मेरठ लोकसभा क्षेत्र से सांसद अरुण गोविल ने संसद में अपने क्षेत्र से जुड़ा एक अहम मुद्दा उठाते हुए गांवों और छोटे कस्बों में खेल सुविधाओं की स्थिति पर सवाल किया। उन्होंने खेल मंत्रालय से पूछा कि क्या इन क्षेत्रों में खेल संसाधनों की उपलब्धता और उनकी स्थिति जानने के लिए कोई सर्वे कराया गया है। साथ ही उन्होंने यह भी जानना चाहा कि खेल सामान निर्माण के लिए देशभर में प्रसिद्ध मेरठ में मल्टी स्पोर्ट्स ट्रेनिंग सेंटर या अकादमी खोलने की कोई योजना है या नहीं।
इस पर सरकार की ओर से जवाब देते हुए खेल मंत्रालय ने कहा कि खेलो इंडिया अभियान के तहत देश के हर जिले में खेल सुविधाओं को मजबूत करने की दिशा में काम किया जा रहा है। मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि “खेलो इंडिया सेंटर” स्थापित करने का प्रावधान किया गया है, जिससे जिला स्तर पर खिलाड़ियों को बेहतर प्रशिक्षण और संसाधन उपलब्ध कराए जा सकें। सरकार ने मेरठ की विशेष पहचान का भी उल्लेख किया। जवाब में कहा गया कि मेरठ ऐतिहासिक रूप से खेल उपकरण निर्माण का प्रमुख केंद्र रहा है और इसे ध्यान में रखते हुए स्पोर्ट्स गुड्स मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने के लिए विशेष प्रयास किए जा रहे हैं। केंद्र सरकार इस सेक्टर को आगे बढ़ाने के लिए नई नीतियों और प्रोत्साहनों पर काम कर रही है। मंत्रालय ने यह भी संकेत दिया कि खेल उद्योग को बढ़ावा देने के साथ-साथ गुणवत्ता और क्षमता के आधार पर “मेरिट” सिस्टम को भी लागू किया जाएगा, जिससे बेहतर प्रदर्शन करने वाले निर्माताओं और खिलाड़ियों को अधिक अवसर मिल सकें।
हालांकि, मेरठ में मल्टी स्पोर्ट्स ट्रेनिंग सेंटर या अकादमी स्थापित करने पर सरकार ने सीधे तौर पर कोई ठोस घोषणा नहीं की, लेकिन खेलो इंडिया मिशन के विस्तार के तहत भविष्य में इस दिशा में संभावनाओं से इनकार भी नहीं किया गया। गौरतलब है कि मेरठ देश-विदेश में क्रिकेट बैट, गेंद, जिम उपकरण और अन्य खेल सामग्री के निर्माण के लिए जाना जाता है। ऐसे में यहां आधुनिक खेल प्रशिक्षण केंद्र की मांग लंबे समय से उठती रही है। संसद में इस मुद्दे के उठने के बाद अब स्थानीय खिलाड़ियों और खेल उद्योग से जुड़े लोगों को सरकार से ठोस पहल की उम्मीद बढ़ गई है।

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