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अयोध्या में शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद का पुतला जलाया गया:RSS के वरिष्ठ प्रचारक इंद्रेश कुमार पर दिए गए बयान का विरोध

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के वरिष्ठ प्रचारक एवं राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य डॉ. इंद्रेश कुमार के विरुद्ध दिए गए कथित आपत्तिजनक बयान के विरोध में अयोध्या में व्यापक आक्रोश देखने को मिला। समाज के विभिन्न वर्गों एवं संगठनों ने इस बयान की कड़ी निंदा करते हुए इसे समाज की भावनाओं एवं राष्ट्रवादी विचारधारा पर आघात बताया। अयोध्या के लता मंगेशकर चौराहे पर डॉ. अनिल कुमार सिंह के नेतृत्व में समाजसेवियों, युवाओं एवं स्थानीय नागरिकों द्वारा विरोध प्रदर्शन आयोजित किया गया। इस दौरान शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद का पुतला दहन किया गया तथा प्रदर्शनकारियों ने जोरदार नारेबाजी करते हुए अपना विरोध दर्ज कराया। प्रदर्शन के दौरान उपस्थित लोगों ने “इंद्रेश कुमार का अपमान नहीं सहेगा अयोध्या”, “राष्ट्रभक्तों का अपमान बंद करो” एवं “देश विरोधी बयानबाजी मुर्दाबाद” जैसे नारे लगाए, जिससे जनभावनाओं में व्याप्त आक्रोश स्पष्ट रूप से परिलक्षित हुआ। इस अवसर पर डॉ. अनिल कुमार सिंह ने कहा कि डॉ. इंद्रेश कुमार एक समर्पित राष्ट्रभक्त एवं राष्ट्रीय विचारक हैं। उन्होंने अपनी बी.टेक. (इंजीनियरिंग) की शिक्षा प्राप्त की है, इसके बावजूद उन्होंने सुविधाजनक करियर को त्यागकर राष्ट्र सेवा का मार्ग चुना। उन्होंने अपना संपूर्ण जीवन राष्ट्रहित के लिए समर्पित किया है तथा राम मंदिर आंदोलन, जम्मू-कश्मीर, सामाजिक समरसता एवं विभिन्न राष्ट्रीय एवं सामाजिक विषयों पर उल्लेखनीय योगदान दिया है। डॉ. सिंह ने आगे कहा कि इस प्रकार की टिप्पणी अत्यंत निंदनीय, दुर्भाग्यपूर्ण एवं अस्वीकार्य है। उन्होंने प्रशासन से मांग की कि इस मामले में तत्काल एवं प्रभावी कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में कोई भी व्यक्ति इस प्रकार की गैर-जिम्मेदाराना बयानबाजी करने से बचे। अपने वक्तव्य में उन्होंने यह भी कहा कि यदि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद अपने विचार, ऊर्जा और बौद्धिक क्षमता को ईश्वर की आराधना एवं समाज के कल्याण में लगाएं, तो उनका स्वयं का भी कल्याण संभव है। उन्होंने आरोप लगाया कि संत अविमुक्तेश्वरानंद निरंतर स्वयं को शंकराचार्य के रूप में स्थापित करने का प्रयास कर रहे हैं, जबकि शंकराचार्य पद की स्थापना एक निर्धारित, परंपरागत एवं विधिसम्मत प्रक्रिया के अंतर्गत होती है। इसे व्यक्तिगत प्रयासों से स्वयं सिद्ध करना उचित नहीं है। डॉ. सिंह ने आगे कहा कि स्वयंभू रूप से किसी भी उच्च धार्मिक पद को धारण करने का प्रयास न केवल परंपराओं के विपरीत है, बल्कि इससे समाज में भ्रम और अनावश्यक विवाद की स्थिति उत्पन्न होती है। उन्होंने कहा कि संत समाज का दायित्व समाज को जोड़ना, मार्गदर्शन देना और आध्यात्मिक मूल्यों को सुदृढ़ करना है, न कि व्यक्तिगत प्रतिष्ठा के लिए विवाद उत्पन्न करना। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि उनके द्वारा पूर्व में राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा के समय पर भी आपत्ति जताई गई थी, जबकि वह अभिजीत मुहूर्त जैसे वैज्ञानिक एवं शास्त्रसम्मत समय पर संपन्न हुआ था। साथ ही कुंभ मेले के संदर्भ में भी अनावश्यक विवाद उत्पन्न करने के प्रयास किए गए, जिन्हें प्रशासन की सूझबूझ से विफल किया गया। अंत में सभी उपस्थित जनों ने देश में शांति, सौहार्द एवं सामाजिक एकता बनाए रखने की अपील की तथा ईश्वर से प्रार्थना की। यह विरोध प्रदर्शन पूर्णतः शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ, जिसमें बड़ी संख्या में लोगों की सहभागिता रही। कार्यक्रम में सैकड़ो के लोग रहे मौजूद जिसमें प्रमुख रूप से मनु प्रताप सिंह एडवोकेट,सील दास सतीश सफारी बालक राम शर्मा अजय कुमार सिंह रवि भारती आदि लोग मौजूद रहे।

Source: Dainik Bhaskar via DNI News (Prayagraj)

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