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अयोध्या में लक्ष्मी नारायण महायज्ञ:5000 यजमानों ने दी सामूहिक आहुति, राजघाट बना आस्था का केंद्र

रामनगरी अयोध्या में जियर स्वामी महाराज के सान्निध्य में चल रहे श्री लक्ष्मी नारायण महायज्ञ के पांचवें दिन सोमवार को भक्ति और आस्था का अद्भुत संगम देखने को मिला। विश्व कल्याण के उद्देश्य से एक साथ करीब 5000 यजमानों ने वैदिक मंत्रोच्चार के साथ आहुति दी। देशभर से उमड़ रही श्रद्धालुओं की भीड़ महायज्ञ में बिहार, झारखंड और उत्तर प्रदेश सहित कई राज्यों से हजारों श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। यज्ञ मंडप की परिक्रमा के लिए लगातार भीड़ उमड़ रही है, जिससे पूरा क्षेत्र भक्तिमय हो गया है। महायज्ञ परिसर में बने विशाल भोजनालय में प्रतिदिन हजारों श्रद्धालु प्रसाद ग्रहण कर रहे हैं। सुबह 10 बजे से रात 12 बजे तक भोजन वितरण का सिलसिला लगातार जारी है। सुबह आरती दिनभर कथा और शाम को प्रवचन महायज्ञ के दौरान प्रतिदिन सुबह 7:30 बजे आरती होती है। इसके बाद दिनभर कथा वाचन चलता है और शाम 7 बजे श्री जियर स्वामी जी महाराज का मुख्य प्रवचन आयोजित किया जाता है। सैकड़ों बच्चों का हुआ उपनयन संस्कार सोमवार को महायज्ञ के दौरान सैकड़ों बच्चों का उपनयन संस्कार भी संपन्न कराया गया। यह धार्मिक आयोजन 26 मार्च तक जारी रहेगा। “कथा सुनने का मतलब बुराइयों का त्याग” प्रवचन के दौरान स्वामी जी ने कहा कि कथा सुनने का वास्तविक उद्देश्य अपने भीतर की बुराइयों को छोड़ना है। उन्होंने बताया कि श्रीमद्भागवत पुराण केवल ग्रंथ नहीं, बल्कि जीवन जीने की सही दिशा दिखाने वाला शास्त्र है। धर्म ज्ञान ही मनुष्य को बनाता है श्रेष्ठ स्वामी ने कहा कि आहार, निद्रा, भय और मैथुन मनुष्य और पशु में समान होते हैं, लेकिन धर्म ही मनुष्य को श्रेष्ठ बनाता है। उन्होंने मनुस्मृति का उल्लेख करते हुए कहा कि धर्म के बिना मनुष्य पशु के समान हो जाता है। जूठा भोजन न करने की दी सीख उन्होंने जीवनशैली से जुड़े नियम बताते हुए कहा कि जूठा भोजन न करना चाहिए और न ही कराना चाहिए, इससे दोष लगता है। साथ ही स्पष्ट किया कि शबरी ने भगवान राम को जूठे बेर नहीं, बल्कि मीठे फलों का चयन कर अर्पित किया था।

Source: Dainik Bhaskar via DNI News (Prayagraj)

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