अयोध्या में शनिवार को रमजान के 30 रोजे पूरे होने के बाद मुस्लिम समुदाय ने ईद-उल-फितर की नमाज अदा की। इस वर्ष ईद का त्योहार ईरान के सुप्रीम लीडर की कथित शहादत और मासूम बच्चों की मौत की खबरों के कारण फीका रहा। शहर और ग्रामीण क्षेत्रों की विभिन्न ईदगाहों तथा मस्जिदों में बड़ी संख्या में मुस्लिम समुदाय के लोग नमाज अदा करने के लिए एकत्र हुए। धर्मगुरुओं ने ईद की नमाज अदा कराई और अपने खुतबे में देश तथा दुनिया में अमन, शांति और भाईचारे के लिए दुआ की। मौलानाओं ने अपने संबोधन में कहा कि यह ईद सामान्य परिस्थितियों वाली नहीं है, बल्कि गम और सब्र का पैगाम देती है। उन्होंने उल्लेख किया कि ईरान के सुप्रीम लीडर आयतुल्ला अली खामेनेई और मासूम बच्चियों की शहादत ने पूरी उम्मत को दुखी किया है, जिसके कारण इस बार खुशियों का इजहार सादगी से करने की अपील की गई। मिल्कीपुर तहसील के देवगांव स्टेट की रानी ने बताया कि समुदाय के लोग इस त्योहार को हर्षोल्लास के साथ नहीं मना रहे हैं। उन्होंने कहा कि नमाज के दौरान शिया समुदाय के लोगों ने काली पट्टी और काले कपड़े पहनकर नमाज अदा की, जो गम और एकजुटता का प्रतीक था। लोगों के चेहरों पर खुशी के साथ-साथ मायूसी भी साफ झलक रही थी। देवगांव स्टेट की रानी ने बताया कि ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई के साथ निर्दोष छोटे-छोटे बच्चे और बच्चियों की शहादत के कारण वे त्योहार नहीं मना रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि शहीद हुए सुप्रीम लीडर का अभी तक 40वां नहीं हुआ है, इसलिए समुदाय ने पुराने कपड़े पहनकर नमाज अदा की और इस बार बहन-बेटियों को कोई त्योहार (उपहार) नहीं दिया गया। सुरक्षा की दृष्टि से पुलिस बल के जवान भी मुस्तैदी से तैनात रहे।

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