DniNews.Live

अयोध्या के रामलला देवस्थान मंदिर में ब्रह्मोत्सव की धूम:भगवान रामलला का भव्य मिलन महामहोत्सव मनाया गया,ध्वज स्थापित हुआ

अयोध्या इन दिनों भक्ति, उत्साह और आध्यात्मिक ऊर्जा से सराबोर है। चैत्र नवरात्रि एवं रामजन्मोत्सव के पावन अवसर पर रामलला देवस्थान मंदिर में आयोजित ब्रह्मोत्सव का उल्लास अपने शिखर पर पहुंच गया है। श्री शेषवाहन पर भगवान की सवारी श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र बनी 24 मार्च को आज प्रातःकाल ध्वजारोहण के साथ महोत्सव का विधिवत आरंभ हुआ। जिसमें 108 कलशों से भगवान का महाभिषेक (तिरुमज्जन) किया गया। नित्य आराधन हवन के बाद श्री शेषवाहन पर भगवान की सवारी श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र बनी। यहां दक्षिण भारतीय वैदिक परंपरा के अनुसार भगवान का विधिवत पूजन, अभिषेक और विविध धार्मिक अनुष्ठान संपन्न हो रहे हैं, जिनमें देशभर से आए श्रद्धालु बढ़-चढ़कर भाग ले रहे हैं।
सोमवार को देर शाम मंदिर परिसर में भगवान रामलला का भव्य मिलन महामहोत्सव आयोजित किया गया। यह आयोजन दक्षिण भारत के प्रख्यात संत पार्थ स्वामी द्वारा स्थापित परंपरा के अनुरूप सम्पन्न हुआ। मंगलगिरि वाहन पर भगवान की भव्य शोभायात्रा निकाली गई इससे पहले सोमवार को संध्या काल में गोलाघाट स्थित अम्माजी मंदिर से मंगलगिरि वाहन पर भगवान की भव्य शोभायात्रा निकाली गई, जिसमें पारंपरिक वाद्ययंत्रों की मधुर ध्वनि से पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठा। इस शोभायात्रा में तमिलनाडु से आए श्रद्धालुओं की विशेष भागीदारी देखने को मिली, जो भगवान के रथ को रस्सों के सहारे खींचते हुए भक्ति भाव में सराबोर नजर आए। शोभायात्रा का रामलला देवस्थान में जगदगुरु स्वामी राघवाचार्य ने स्वागत किया
शोभायात्रा जब रामलला देवस्थान पहुंची, तो वहां आचार्यों द्वारा दक्षिण भारतीय परंपरा के अनुसार विधिवत आरती और पूजन किया गया। इसके पश्चात श्रद्धालुओं के बीच प्रसाद वितरण किया गया और भगवान को पुनः रथ पर विराजमान कर अम्माजी मंदिर ले जाया गया। इस पूरे आयोजन ने श्रद्धालुओं को अद्भुत आध्यात्मिक अनुभूति प्रदान की।
रामलला सदन देवस्थान के पीठाधीश्वर जगद्गुरु रामानुजाचार्य स्वामी डॉ. राघवाचार्य महाराज के निर्देशन में यह महोत्सव भव्यता के साथ आयोजित किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि यह पंचदिवसीय ब्रह्मोत्सव श्रद्धा, भक्ति और वैदिक परंपराओं का अद्वितीय संगम है, जिसमें प्रतिदिन विभिन्न धार्मिक अनुष्ठान, हवन, अभिषेक और भगवान की दिव्य सवारियां निकाली जा रही हैं।
महोत्सव का शुभारंभ संध्या बेला में मृदाहरण, अंकुरारोपण, रक्षाबंधन और गरुड़ प्रतिष्ठा जैसे वैदिक अनुष्ठानों के साथ हुआ।
25 मार्च को सप्तमी तिथि पर प्रातःकाल श्री गरुड़वाहन पर भगवान की शोभायात्रा निकलेगी, जबकि सायंकाल श्री हनुमतवाहन पर भव्य यात्रा आयोजित होगी। 26 मार्च (अष्टमी) को सिंहवाहन और गजवाहन पर भगवान की दिव्य सवारियां निकाली जाएंगी, जिनका दर्शन करने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु उमड़ेंगे।
27 मार्च को रामनवमी के पावन अवसर पर भगवान का अवतारोत्सव और कल्याणोत्सव अत्यंत धूमधाम से मनाया जाएगा। इस दिन मंगलगिरि वाहन पर भगवान की विशेष सवारी पूरे आयोजन का मुख्य आकर्षण रहेगी। वहीं 28 मार्च (दशमी) को सरयू स्नान, पुष्पयाग, हवन पूर्णाहुति और ध्वजावरोहण के साथ ब्रह्मोत्सव का समापन होगा। सरयू नदी में भगवान का अवभृथ स्नान इस महोत्सव का अत्यंत पवित्र और महत्वपूर्ण क्षण माना जाता है।
डॉ. राघवाचार्य महाराज ने बताया कि रामलला सदन देवस्थान में विराजमान भगवान रामलला का उत्सव विग्रह पूज्य पार्थ स्वामीजी द्वारा स्थापित अम्माजी मंदिर से यहां लाया गया है। उसी उत्सव विग्रह का यह मिलन महोत्सव मनाया जा रहा है, जिसमें अम्माजी मंदिर से विग्रह लाकर विशेष पूजन-अर्चन किया गया।
उन्होंने श्रद्धालुओं से अपील करते हुए कहा कि अधिक से अधिक संख्या में लोग इस ब्रह्मोत्सव में शामिल होकर भगवान की दिव्य सवारियों, कल्याणोत्सव और वैदिक अनुष्ठानों का पुण्य लाभ प्राप्त करें। साथ ही इस आध्यात्मिक वातावरण का अनुभव कर अपने जीवन को धर्ममय बनाएं।
पूरे आयोजन के दौरान अयोध्या नगरी भक्ति, उल्लास और आध्यात्मिकता से सराबोर नजर आ रही है। मंदिर परिसर में गूंजते वैदिक मंत्र, पारंपरिक वाद्ययंत्रों की ध्वनि और श्रद्धालुओं की आस्था इस महोत्सव को अद्वितीय बना रही है। देश के विभिन्न हिस्सों से आए संत-महात्मा और आचार्यगण भी इस आयोजन में अपनी सहभागिता निभा रहे हैं, जिससे इसका धार्मिक महत्व और अधिक बढ़ गया है।
ब्रह्मोत्सव के इस दिव्य आयोजन ने न केवल धार्मिक परंपराओं को सजीव किया है, बल्कि उत्तर और दक्षिण भारतीय संस्कृतियों के समन्वय का भी अद्भुत उदाहरण प्रस्तुत किया है। अयोध्या में इस प्रकार के आयोजनों से न केवल आध्यात्मिक चेतना का प्रसार हो रहा है, बल्कि देश की सांस्कृतिक एकता भी सुदृढ़ हो रही है। इस अवसर पर आश्रम के प्रबंधक राघवेंद्र मिश्र सहित बड़ी संख्या में संत-महंत और श्रद्धालुओं की मौजूदगी रही।

Source: Dainik Bhaskar via DNI News (Prayagraj)

Puri Khabar Yahan Padhein…

Comments

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *