चैत्र पूर्णिमा के पर्व पर दक्षिण भारतीय परम्परा के तहत कालेराम मंदिर व जानकी महल में हनुमान जयंती अनुष्ठान पूर्वक मनाई जाएगी। इस अवसर पर कालेराम मंदिर में जहां भगवान भोर में भगवान की जयंती अभिषेक पूजन के साथ मनाई जाएगी। वहीं जानकी महल में यह आयोजन गोधूलि बेला में होगा। गर्भगूह में विराजमान भगवान को 56 भोग लगाया जाएगा। कालेराम मंदिर के मुख्य आचार्य गोपाल राव देशपांडे ने बताया कि यहां दक्षिण भारत की परम्परा के अनुसार हनुमान जयंती मनाई जाती है। उन्होंने बताया कि अयोध्या की परम्परा में कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी जिसे नरक चतुर्दशी या छोटी दीवाली को भी हनुमान जयंती की परम्परा का निर्वहन यहां किया जाता है। कालेराम मंदिर में दक्षिणाभिमुख हनुमान की मूर्ति
कालेराम मंदिर में दक्षिणाभिमुख हनुमान जी विराजित हैं। उनका स्वरूप देवी मां का है। हनुमान जी ने यह स्वरुप अहिरावण के वन के लिए धारण किया था। उसने भगवान राम व लक्ष्मण जी मूर्छित कर दिया था और फिर पाताल लोक ले जाकर वहां माता महाकाली के समक्ष उनकी बलि देने के प्रयास में था। जानकी महल के ट्रस्टी आदित्य सुल्तानिया ने बताया कि यहां सालासर राजस्थान के हनुमान जी की परम्परा में चैत्र पूर्णिमा को हनुमान जयंती मनाई जाती है। इस अवसर पर गोधूलि बेला में भगवान का अभिषेक पूजन व श्रृंगार के साथ 56 भोग और बधाई गान चलता है। उन्होंने यह भी जानकारी दी कि इस तिथि पर भगवान राम के छठ्योत्सव के कार्यक्रम को भी विराम दिया जाएगा। इस छठ्योत्सव में भगवान के स्वरूपों की झांकी सजाई जाएगी और बधाई गान का सिलसिला देर रात तक चलता रहेगा।

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