अम्बेडकरनगर में चोरी की खुलासे की जगह ‘क्लोजर’ का खेल:अकबरपुर पुलिस की एफआर पर सवाल, सीओ सिटी ने दोबारा जांच के आदेश दिए
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अम्बेडकरनगर में चोरी की खुलासे की जगह ‘क्लोजर’ का खेल:अकबरपुर पुलिस की एफआर पर सवाल, सीओ सिटी ने दोबारा जांच के आदेश दिए
अम्बेडकरनगर में अकबरपुर कोतवाली पुलिस की कार्यशैली एक बार फिर सवालों के घेरे में है। चोरी की गंभीर वारदातों के खुलासे में नाकामी के बाद पुलिस द्वारा फाइनल रिपोर्ट (एफआर) लगाकर मामलों को बंद किए जाने से आमजन गहरा असंतोष है। हालात ऐसे बन गए हैं कि पीड़ित को न्याय नहीं मिल रहा। जबकि खाकी पर जिम्मेदारी से बचने के आरोप लग रहे है। 19 जून 2025 को मरैला गांव में एलआईसी एजेंट प्रीतम पाल के घर हुई चोरी ने इलाके को हिला दिया था। चोरों ने सुनियोजित तरीके से लाखों की नकदी और जेवरात पर हाथ साफ कर दिया। पीड़ित की तहरीर पर मुकदमा दर्ज हुआ। पुलिस से कार्रवाई की उम्मीद हुई, लेकिन महीनों की जांच के बाद भी जब कोई सुराग नहीं मिला तो पुलिस ने एफआर लगाकर केस बंद कर दिया। इस फैसले से पीड़ित परिवार खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहा है। इसी कड़ी में 3 अगस्त 2025 को बरियावन बाजार में सर्राफा व्यवसायी की दुकान में हुई बड़ी चोरी भी पुलिस के लिए चुनौती बनी रही। शटर तोड़कर घुसे चोर करीब 40 लाख रुपये के सोने-चांदी के जेवरात समेट ले गए। यह वारदात न सिर्फ आर्थिक रूप से बड़ी थी, बल्कि कानून-व्यवस्था पर भी सवाल खड़े करती है। बावजूद इसके इस मामले में भी पुलिस कोई ठोस सुराग नहीं जुटा सकी और एफआर लगाकर फाइल बंद कर दी गई। लगातार दो बड़े मामलों में एक जैसी कार्रवाई ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिए है। लोगों का मानना है कि यदि पुलिस इसी तरह मामलों को बंद करती रही, तो अपराधियों के हौसले और बढ़ेंगे और जनता का भरोसा पूरी तरह से उठ जाएगा। मामला जब सार्वजनिक हुआ तो सीओ सिटी नीतीश तिवारी ने हस्तक्षेप करते हुए दोनों मामलों की दोबारा विवेचना के आदेश दिए है। अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या दोबारा जांच में सच्चाई सामने आएगी या फिर यह मामले भी कागजी कार्रवाई बनकर रह जाएंगे। इस बाबत सीओ सिटी ने बताया कि दोबारा विवेचना के आदेश दिए गए है।
Source: Dainik Bhaskar via DNI News
