गौरीगंज रेलवे स्टेशन पर यात्रियों को बुनियादी सुविधाओं के अभाव का सामना करना पड़ रहा है। विशेषकर प्लेटफॉर्म नंबर 2, जहां से लखनऊ, दिल्ली और पंजाब की ओर जाने वाली ट्रेनें गुजरती हैं, वहां स्थिति बेहद खराब है। पूरे प्लेटफॉर्म पर एक भी शेड नहीं है, जिससे यात्रियों को धूप में खड़े रहने या ओवरब्रिज के नीचे छांव तलाशने पर मजबूर होना पड़ता है। दिव्यांगजनों, बुजुर्गों और महिलाओं को सबसे अधिक परेशानी हो रही है, जिन्हें ट्रेन का इंतजार करते हुए जमीन पर बैठना पड़ता है। पेयजल और शौचालय जैसी मूलभूत सुविधाएं भी नदारद हैं, जिससे यात्रियों की मुश्किलें और बढ़ जाती हैं। स्टेशन परिसर में गंदगी का अंबार भी बदइंतजामी को दर्शाता है। प्लेटफॉर्म नंबर 3 पर एसीसी सीमेंट की रैक लगने से स्थिति और गंभीर हो जाती है। सीमेंट की ढुलाई के दौरान उड़ने वाली धूल पूरे स्टेशन को अपनी चपेट में ले लेती है, जिससे यात्रियों को सांस लेने में तकलीफ और आंखों में जलन जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि स्टेशन मास्टर प्रवीण सिंह, जो लगभग 20 किलोमीटर दूर पड़ोसी जनपद के निवासी हैं और लंबे समय से इसी स्टेशन पर कार्यरत हैं, उनकी लापरवाही के कारण ही हालात बद से बदतर होते जा रहे हैं। आरोप है कि जिम्मेदार पद पर होने के बावजूद उन्होंने व्यवस्थाओं को सुधारने के लिए कोई ठोस पहल नहीं की। कांग्रेस प्रवक्ता अनिल सिंह ने इस स्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि यदि जिम्मेदार ही आंखें मूंद लें, तो यात्रियों की सुध कौन लेगा। यात्रियों ने रेलवे प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप कर शेड, बैठने की व्यवस्था, साफ-सफाई, पेयजल, शौचालय और धूल नियंत्रण के ठोस इंतजाम करने की मांग की है, ताकि गौरीगंज स्टेशन की बदहाली दूर हो सके।

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