पीलीभीत के बहुचर्चित अनिल पाल हत्याकांड में सत्र न्यायालय ने सोमवार को मुख्य आरोपी निधि मिश्रा की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी। सत्र न्यायाधीश रविन्द्र कुमार–IV ने अपराध की गंभीरता और लंबित जांच को देखते हुए यह फैसला सुनाया। मामला कोतवाली थाना क्षेत्र का है, जहां अनिल पाल की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हुई थी। शुरुआत में इसे आत्महत्या बताया गया, लेकिन परिजनों के आरोप और पुलिस जांच के बाद मामला हत्या की साजिश में बदल गया। अभियोजन पक्ष के अनुसार, साजिश के तहत अनिल पाल को पहले जहरीला पदार्थ दिया गया और बेहोश होने के बाद उसे फांसी पर लटका दिया गया, ताकि मामला आत्महत्या लगे। इस घटना के पीछे अवैध संबंधों का विवाद कारण बताया जा रहा है। सुनवाई के दौरान अभियोजन ने कोर्ट को बताया कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में जहर के संकेत मिले हैं और विसरा जांच के लिए भेजा गया है, जिसकी रिपोर्ट अभी आनी बाकी है। साथ ही यह भी कहा गया कि आरोपी को जमानत मिलने पर वह गवाहों को प्रभावित कर सकती है या साक्ष्य नष्ट कर सकती है। वहीं, बचाव पक्ष ने आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि निधि मिश्रा को झूठा फंसाया गया है और मामला आत्महत्या का है। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने माना कि मामला गंभीर है और प्रथम दृष्टया आरोपी की भूमिका संदिग्ध है। ऐसे में अदालत ने अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी।

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