मेरठ में डॉ. भीमराव अंबेडकर जयंती समारोह को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। जयंती की शोभायात्रा की अनुमति के लिए दो अलग-अलग संगठनों ने आवेदन किया है, जिससे दोनों गुट आमने-सामने आ गए हैं। सर्व समाज ने भाजपा संगठन से जुड़े कुछ लोगों पर शोभायात्रा का स्वरूप छोटा करने का आरोप लगाया है। बाबासाहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर जन्मोत्सव समारोह समिति, जो लगभग 1989 से भैंसाली मैदान से निकलने वाली जयंती मनाती आ रही है, इस विवाद के केंद्र में है। समिति के सदस्यों का कहना है कि कुछ भाजपा से जुड़े लोग जयंती को विवादास्पद बनाना चाहते हैं और इसके स्वरूप को छोटा करना चाहते हैं।
समिति ने 16 तारीख को सर्वसम्मति से प्रमोद खड़ोली को अध्यक्ष चुना था। प्रमोद खड़ोली पूर्व पार्षद और पहले भी जयंती समिति के अध्यक्ष रह चुके हैं। जिसमें शहर के गणमान्य लोग मौजूद थे। महेंद्र भारती ने भी उस समय इस निर्णय को स्वीकार कर लिया था। हालांकि, आरोप है कि भाजपा के कुछ लोग जयंती को विवादों में घसीटना चाहते हैं। इस साजिश के तहत महेंद्र भारती ने कथित तौर पर उनकी कठपुतली बनकर काम किया। उन्होंने समाज को बिना बताए, दो दिन बाद, डॉ. भीमराव अंबेडकर जन्मोत्सव समारोह समिति के ही बैनर पर एक अलग अनुमति आवेदन डाल दिया। आरोप लगाने वालों का कहना है कि कमल दत्त शर्मा, एक भाजपा विधायक जैसे कुछ लोग बाबासाहेब के नाम को छोटा करने और उनकी जयंती के स्वरूप को बिगाड़ने के लिए लगातार अलग-अलग तरीकों से हमला कर रहे हैं। उनका उद्देश्य जयंती का भगवाकरण करना है। यह भी बताया गया कि महेंद्र भारती की बुलाई गई बैठक में ही प्रमोद खड़ोली को अध्यक्ष चुना गया था और महेंद्र भारती ने इसे स्वीकार भी किया था। लेकिन बाद में, एक बंद कमरे में चरण सिंह लिसाड़ी और महेंद्र भारती ने मिलकर प्रमोद खड़ोली की जयंती की अनुमति को रद्द कराकर अपनी जयंती की अनुमति लेने की साजिश रची। इसे गैर-कानूनी और गैर-संवैधानिक बताया जा रहा है, जिसका मकसद बाबासाहेब की जयंती के स्वरूप को छोटा करना है।

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