अंतर्राष्ट्रीय वन दिवस के अवसर पर आज राजधानी लखनऊ में “अरण्य समागम: राष्ट्रीय वानिकी संवाद” कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है। इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में होने वाली इस एक दिवसीय कार्यशाला का शुभारंभ आज सुबह 10 बजे मुख्यमंत्री करेंगे। इस कार्यक्रम में प्रदेश के वन एवं पर्यावरण विभाग के अधिकारी, विशेषज्ञ और देशभर से आए वरिष्ठ वनाधिकारी भाग लेंगे। आयोजन का उद्देश्य वनों के संरक्षण, विकास और उन्हें जन आंदोलन का स्वरूप देने पर चर्चा करना है। वन एवं अर्थव्यवस्था पर होगा विशेष फोकस कार्यशाला का मुख्य विषय “वन एवं अर्थव्यवस्थाएं” रखा गया है। तकनीकी सत्रों में वानिकी क्षेत्र में नवाचार, वन प्रबंधन के आधुनिकीकरण और डिजिटलीकरण, मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने के उपायों पर विस्तार से चर्चा की जाएगी। साथ ही कैम्पा फंड के प्रभावी उपयोग और वन्यजीव संरक्षण से जुड़े मुद्दों पर भी विशेषज्ञ अपने सुझाव देंगे। वनों की भूमिका और बढ़ता दायरा विशेषज्ञों का मानना है कि वन पर्यावरण संतुलन के साथ-साथ रोजगार और अर्थव्यवस्था का भी मजबूत आधार हैं। प्रदेश में वन आधारित उद्योगों को बढ़ावा देने के चलते पिछले 9 वर्षों में 2467 से अधिक उद्योग स्थापित किए गए हैं। 243 करोड़ पौधरोपण से बढ़ा वनावरण प्रदेश में जनभागीदारी के जरिए 243 करोड़ से अधिक पौधे लगाए गए हैं, जिससे वनावरण में वृद्धि हुई है। इसके साथ ही बाघ, हाथी, डॉल्फिन, सारस और गिद्ध जैसे वन्यजीवों की संख्या में भी सुधार देखने को मिला है। जन आंदोलन बना वृक्षारोपण अभियान प्रदेश में वृक्षारोपण को जन आंदोलन के रूप में विकसित किया गया है। विभिन्न अवसरों पर बड़े पैमाने पर पौधरोपण के साथ पर्यावरण संरक्षण और जागरूकता कार्यक्रम चलाए जाते हैं। नदियों के किनारों, एक्सप्रेस-वे और राजमार्गों के आसपास भी पौधरोपण को प्राथमिकता दी जा रही है। अटल वन, एकलव्य वन, ऑक्सी वन और शौर्य वन जैसे विशेष वन भी विकसित किए गए हैं। किसानों को कार्बन क्रेडिट से लाभ किसानों को वृक्षारोपण से जोड़ने के लिए कार्बन फाइनेंस प्रोजेक्ट के तहत कार्बन क्रेडिट के बदले आर्थिक सहायता दी जा रही है। इस पहल को लागू करने वाला उत्तर प्रदेश देश का पहला राज्य है।

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