सीतामढ़ी के सोनबरसा प्रखंड की पुरंदाहा राजवाड़ा पश्चिमी पंचायत में एक गंभीर प्रशासनिक लापरवाही का मामला सामने आया है। यहां पंचायत सचिव की कथित गलत जांच रिपोर्ट के कारण कई जीवित वृद्ध महिला-पुरुषों को सरकारी कागजों में ‘मृत’ घोषित कर दिया गया है। इसके परिणामस्वरूप, उनकी वृद्धा पेंशन बंद हो गई है, जिससे इन बुजुर्गों के सामने आजीविका का संकट खड़ा हो गया है। जानकारी के अनुसार, राजवाड़ा पश्चिमी पंचायत में पहले से वृद्धा पेंशन का लाभ ले रहे आधा दर्जन से अधिक लाभार्थियों की पेंशन रोक दी गई है। उन्हें बताया गया कि जांच के दौरान उन्हें ‘मृत’ पाया गया है। आरोप है कि पंचायत सचिव ने बिना मौके पर सत्यापन किए ही कागजों पर रिपोर्ट तैयार कर दी, जिसके बाद सिस्टम में इन लाभार्थियों की स्थिति ‘मृत’ दर्ज हो गई और भुगतान रोक दिया गया। बुढ़ापे का एकमात्र सहारा पेंशन ही बंद हो गई पश्चिमी पंचायत के जहदी और मयूरवा गांव के निवासी कमश मयूरवा, फूलकुमारी देवी (पति सत्य नारायण राय) और जयवीर पासवान सहित कई अन्य वृद्ध महिला-पुरुष अपनी समस्या लेकर मीडिया के सामने आए। उन्होंने अपने दस्तावेज दिखाते हुए बताया कि वे जीवित हैं, फिर भी उन्हें मृत घोषित कर दिया गया है। एक वृद्ध महिला ने अपनी पीड़ा व्यक्त करते हुए कहा कि बुढ़ापे का एकमात्र सहारा पेंशन ही बंद हो गई है। जीवित लाभार्थियों को कागजों में मृत दर्शाया गया स्थानीय लोगों का कहना है कि ऐसे और भी मामले हो सकते हैं, जिनमें जीवित लाभार्थियों को कागजों में मृत दर्शाया गया है। पीड़ितों को यह भी नहीं पता कि वे अपनी शिकायत लेकर किस अधिकारी के पास जाएं और इसकी प्रक्रिया क्या है। उन्होंने बताया कि ठंड कम होने के बाद वे संबंधित अधिकारियों से मिलकर अपनी समस्या बताएंगे। पंचायत सचिव से संपर्क करने का प्रयास किया गया इस मामले में पंचायत सचिव से संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन खबर लिखने तक उनसे संपर्क नहीं हो सका। वहीं, प्रशासनिक स्तर पर जांच और त्वरित सुधार की मांग उठ रही है, ताकि जिंदा लाभुकों को उनका हक मिल सके और दोषियों पर कार्रवाई।
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