मधुबनी में कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष राजेश राम और वरिष्ठ नेता शकील अहमद खान के कार्यक्रम के दौरान हुए हंगामे और मारपीट के बाद प्रदेश की सियासत गर्मा गई है। इस मामले को लेकर बुधवार को कांग्रेस अध्यक्ष सुबोध मंडल ने दोपहर करीब 12 बजे प्रेस कॉन्फ्रेंस किया जिसमें उन्होंने इसे सुनियोजित मामला बताया साथ ही एनएसयूआई के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष को इसके लिए जिम्मेदार ठहराया। आइए जानते हैं क्या है पूरा मामला दरअसल मंगलवार को बिहार विधानसभा चुनाव में मिली हार के कारणों का पता लगाने के लिए कांग्रेस ने एक बैठक आयोजित की थी, जिसमें प्रदेश अध्यक्ष राजेश राम और कांग्रेस विधायक दल के पूर्व नेता शकील अहमद खान भी शामिल हुए थे। इसी बीच टिकट बंटवारे में अनियमितता का आरोप लगाते हुए कांग्रेस कार्यकर्ताओं के दो गुट आपस में भिड़ गए और दोनों में जमकर लाठी-डंडे चले।
राशिद फाखरी पर लगाया हंगामा करने का आरोप प्रेस कॉन्फ्रेंस में मधुबनी जिला कांग्रेस अध्यक्ष सुबोध मंडल ने इस पूरे घटनाक्रम के लिए एनएसयूआई के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष राशिद फाखरी को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने आरोप लगाया कि यह हंगामा पूरी तरह से सुनियोजित था, जिसका उद्देश्य पार्टी की छवि को नुकसान पहुंचाना और वरिष्ठ नेताओं के कार्यक्रम को बाधित करना था। कार्यक्रम स्थल पर फैलाई गई अव्यवस्था मंडल ने कहा कि राशिद फाखरी ने अपने समर्थकों के माध्यम से कार्यक्रम स्थल पर जानबूझकर अव्यवस्था फैलाई, जिससे कार्यकर्ताओं में भ्रम और आक्रोश उत्पन्न हुआ। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि नारेबाजी और हंगामा कर वरिष्ठ नेताओं का अपमान करने की कोशिश की गई, जो कांग्रेस की विचारधारा के खिलाफ है। अनुशासनहीनता बर्दाश्त नहीं की जाएगी सुबोध मंडल ने स्पष्ट किया कि कांग्रेस एक अनुशासित पार्टी है और ऐसी अराजकता बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने पार्टी मंच का दुरुपयोग कर व्यक्तिगत स्वार्थ साधने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग करते हुए कहा कि पूरे मामले की रिपोर्ट प्रदेश नेतृत्व को भेजी जाएगी। उन्होंने चेतावनी दी कि भविष्य में ऐसी हरकतें दोहराई गईं तो पार्टी कठोर कदम उठाएगी। अन्य नेताओं ने भी जताई नाराजगी इस घटना के बाद कांग्रेस नेता नलिनी रंजन झा उर्फ रूपन झा, पूर्व जिला अध्यक्ष मनोज मिश्र और मधुबनी नगर निगम के डिप्टी मेयर अमानुल्लाह खान ने भी नाराजगी व्यक्त की। उन्होंने इस दुर्भाग्यपूर्ण और सुनियोजित घटना से कार्यकर्ताओं में भारी नाराजगी होने की बात कही। कई कार्यकर्ताओं ने भी अनुशासनहीनता के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। फिलहाल, इस पूरे घटनाक्रम को लेकर राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज है। सबकी निगाहें बिहार प्रदेश कांग्रेस नेतृत्व के अगले फैसले पर टिकी हुई हैं।
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