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बाल विवाह के खिलाफ चलेगा 100 दिनों का अभियान:बेगूसराय में जज ने की अपील, कहा- गांव-गांव जाकर लोगों को करें जागरूक

बिहार राज्य विधिक सेवा प्राधिकार (बालसा) के निर्देश पर जिला विधिक सेवा प्राधिकार की ओर से बाल विवाह पर रोकथाम के लिए 100 दिनों तक व्यापक जन-जागरूकता कार्यक्रम चलाया जाएगा। इसके लिए डीएलएसए के अध्यक्ष जिला एवं सत्र न्यायाधीश ऋषि कांत के निर्देश पर आज से 6 दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम की शुरुआत की गई है। डीएलएसए भवन में आयोजित प्रशिक्षण कार्यक्रम का नेतृत्व जिला विधिक सेवा प्राधिकार के सचिव करुणा निधि प्रसाद आर्य कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि इस अभियान के तहत जिले के सभी प्रखंडों में 100 दिनों तक व्यापक जन-जागरूकता कार्यक्रम चलाया जाएगा। जिसमें पराविधिक स्वयंसेवक (पीएलवी) और अधिकार मित्र अहम भूमिका निभाएंगे। सहयोगी संस्था के साथ मिलकर चलेगा इस अभियान सहयोगी संस्था के साथ मिलकर चलेगा। अभियान को प्रभावी बनाने के लिए आंगनबाड़ी सेविकाओं व आशा कार्यकर्ताओं का भी सहयोग लिया जा रहा है। प्रखंड स्तर पर प्रशिक्षण एवं जागरूकता कार्यक्रमों के लिए पैनल अधिवक्ताओं व पराविधिक स्वयंसेवकों की प्रतिनियुक्ति की गई है। जिला विधिक सेवा प्राधिकार के बैनर तले संदेश दिया जा रहा है। नारा दिया जा रहा है कि हर बेटी की यही पुकार-बाल विवाह मुक्त हो परिवार, हम सबने ठाना है-बाल विवाह मिटाना है। इस अभियान में महिला एवं बाल विकास मंत्रालय भारत सरकार का भी सहयोग प्राप्त है। सचिव करुणा निधि प्रसाद आर्य ने कहा कि बाल विवाह एक गंभीर कानूनी अपराध है, जिसके लिए दोषियों को 6 महीने तक की जेल या 2 लाख रुपए तक का जुर्माना या दोनों की सजा हो सकती है। आयोजन से जुड़े अन्य लोग भी दोषी उन्होंने स्पष्ट किया कि बाल विवाह में केवल माता-पिता ही नहीं, बल्कि टेंट संचालक, हलवाई, पंडित व आयोजन से जुड़े अन्य लोग भी दोषी माने जाएंगे। आम जनता को कहीं भी बाल विवाह की जानकारी मिले, तो तुरंत स्थानीय थाना या जिला प्रशासन को सूचित करें। आज भी भारत में 30 से 40 प्रतिशत तक बाल विवाह के मामले सामने आते हैं। जबकि सरकार इसके उन्मूलन के लिए लगातार अभियान चला रही है। बच्चों को शिक्षा का अधिकार (RTE) प्राप्त है और समाज को यह समझना होगा कि बच्चों की शादी नहीं, बल्कि उनकी शिक्षा और सुरक्षित भविष्य सबसे बड़ी जिम्मेदारी है। बाल विवाह से सबसे अधिक नुकसान लड़कियों को होता है, जिससे उनकी शिक्षा, स्वास्थ्य और आत्मनिर्भरता प्रभावित होती है। कम उम्र में गर्भधारण से मातृ व शिशु मृत्यु दर बढ़ने का भी गंभीर खतरा रहता है। अधिकार मित्रों और स्वयंसेवकों से आह्वान किया गया कि वे गांव-गांव जाकर लोगों को जागरूक करें और बेगूसराय जिले को बाल विवाह मुक्त बनाने में सक्रिय भूमिका निभाएं। राष्ट्र को आगे बढ़ाने के लिए बाल विवाह मुक्त समाज बनाना जरूरी है। इस अवसर पर संबंधित पीएलवी, पैनल अधिवक्ता, वरिष्ठ पैनल अधिवक्ता व डीएलएसए के सहायक सहित अन्य उपस्थित थे।


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