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कनाडाई PM के बयान से नाराज हुए ट्रम्प:गाजा पीस बोर्ड का न्योता छीना, कार्नी ने कहा था- अमेरिकी दबदबे वाली दुनिया खत्म हुई

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प कनाडाई प्रधानमंत्री मार्क कार्नी के एक बयान से नाराज हो गए हैं। उन्होंने कार्नी से गाजा ‘बोर्ड ऑफ पीस’ में शामिल होने का न्योता वापस ले लिया। ट्रम्प ने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर लिखा प्रिय प्रधानमंत्री कार्नी जी, यह लेटर आपको मिले पीस बोर्ड के निमंत्रण को वापस लेने के बारे में है, जो अब तक का सबसे प्रतिष्ठित लीडर्स बोर्ड होने वाला है। दरअसल कार्नी ने 20 जनवरी को दावोस में वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम में कहा था कि अमेरिका के दबदबे वाली वैश्विक व्यवस्था अब खत्म हो चुकी है। ट्रम्प बोले- अमेरिका की वजह से कनाडा चल रहा कार्नी के बयान के अगले दिन 21 जनवरी को ट्रम्प ने दावोस में उन्हें खरी-खोटी सुनाई। ट्रम्प ने कहा कि कनाडा को अमेरिका से बहुत कुछ मुफ्त में मिलता है। उन्हें इसके लिए अमेरिका का आभारी होना चाहिए, लेकिन वह नहीं है। ट्रम्प ने कहा कि “कनाडा, अमेरिका की वजह से ही टिका हुआ है। कनाडाई पीएम अगली बार बयान देते वक्त यह बात याद रखें।” इसके जवाब में कार्नी ने गुरुवार को कहा कनाडा और अमेरिका ने अर्थव्यवस्था, सुरक्षा और कल्चर में शानदार पार्टनरशिप बनाई है। लेकिन कनाडा अमेरिका की वजह से जीवित नहीं है। कनाडा इसलिए फल-फूल रहा है क्योंकि हम कनाडाई हैं। कार्नी ने कहा था- टैरिफ को हथियार बनाया जा रहा, दुनिया टूट रही है मार्क कार्नी ने दावोस में कहा कि दुनिया किसी बदलाव की तरफ नहीं, बल्कि टूटने की तरफ आगे बढ़ रही है। कार्नी ने कहा- “हाल के वर्षों में आर्थिक और राजनीतिक संकटों ने दिखा दिया है कि देशों की ज्यादा वैश्विक निर्भरता उन्हें जोखिम में डाल सकती है।” कार्नी ने अमेरिकी टैरिफ नीति को भी गलत बताया था। उन्होंने कहा, “बड़े देश अब इन्हें हथियार की तरह इस्तेमाल करके दबाव डाल रहे हैं, जिससे कमजोर देशों को मजबूर किया जा रहा है। कार्नी ने कनाडा के घरेलू संसाधनों और क्षमताओं को मजबूत करने पर जोर दिया। साथ ही कहा कि हमें किसी एक देश पर निर्भरता कम करनी होगी। कार्नी ने कहा था “जो देश खुद को खिला नहीं सकता, ऊर्जा नहीं दे सकता और अपनी रक्षा नहीं कर सकता, उसके पास बहुत कम विकल्प होते हैं। ट्रम्प ने बोर्ड ऑफ पीस लॉन्च किया, भारत और यूरोपीय देश नहीं पहुंचे ट्रम्प ने गुरुवार को दावोस में जंग सुलझाने के लिए बनाए गए ‘बोर्ड ऑफ पीस’ को लॉन्च किया। व्हाइट हाउस ने इस बोर्ड में शामिल होने के लिए 60 देशों को न्योता भेजा था, लेकिन सिर्फ 20 देश ही हस्ताक्षर समारोह में मौजूद रहे। ट्रम्प के बनाए गाजा ‘बोर्ड ऑफ पीस’ में 8 इस्लामिक देशों ने शामिल होने पर सहमति जताई है। इन देशों में कतर, तुर्किये, मिस्र, जॉर्डन, इंडोनेशिया, पाकिस्तान, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) शामिल हैं। भारत से कोई हस्ताक्षर समारोह में शामिल नहीं हुआ। वहीं अमेरिका के सहयोगी माने जाने वाले ज्यादातर यूरोपीय देश भी इस समारोह से गायब रहे। गाजा बोर्ड ऑफ पीस क्या है? ट्रम्प ने पहली बार पिछले साल सितंबर 2025 में गाजा युद्ध खत्म करने की योजना पेश करते हुए इस बोर्ड का प्रस्ताव रखा था। रॉयटर्स के मुताबिक, अमेरिका ने करीब 60 देशों को इस बोर्ड में शामिल होने का न्योता भेजा है। पिछले हफ्ते दुनिया के नेताओं को भेजे गए न्योते में बताया गया कि इस बोर्ड की भूमिका सिर्फ गाजा तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि यह वैश्विक स्तर पर संघर्षों को सुलझाने में भी काम करेगा। भेजे गए एक मसौदा (चार्टर) में कहा है कि जो देश तीन साल से ज्यादा समय तक इस बोर्ड का सदस्य बनना चाहते हैं, उन्हें 1 अरब डॉलर का योगदान देना होगा। ————————————— गाजा पीस बोर्ड से जुड़ी ये खबर भी पढ़ें… ट्रम्प के गाजा पीस बोर्ड को लेकर घिरे पाकिस्तानी PM: सदस्यता लेने पर विपक्ष बोला- जल्दबाजी में कदम उठाया; यह अमीरों का क्लब बन रहा पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने गुरुवार को दावोस में अमेरिका के ‘बोर्ड ऑफ पीस’ के चार्टर पर साइन किए हैं। इस बोर्ड को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की अगुवाई में गाजा के सीजफायर को मजबूत करने के लिए बनाया गया है। पूरी खबर यहां पढ़ें…


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