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अमेरिकी राजदूत की ईरान को चेतावनी:ट्रम्प बातें नहीं करते, एक्शन लेते हैं; ईरानी राजदूत का जवाब- टकराव नहीं चाहते, लेकिन हमला किया तो बख्शेंगे नहीं

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) की आपात बैठक में अमेरिका ने गुरुवार को ईरान को कड़ा संदेश दिया है। अमेरिकी राजदूत माइक वाल्ट्ज ने कहा कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने साफ कर दिया है कि ईरान में विरोध प्रदर्शनों पर हो रही क्रूर दमनकारी कार्रवाई को रोकने के लिए सभी विकल्प खुले हैं। उन्होंने ईरान के लोगों की बहादुरी की सराहना की और कहा कि ईरान के लोगों ने इतिहास में कभी भी इतने जोरदार तरीके से आजादी की मांग नहीं की। वाल्ट्ज ने कहा, “ट्रम्प एक्शन लेने वाले इंसान हैं, लंबी-लंबी बातें करने वाले नहीं।” उन्होंने चेतावनी दी कि ईरान के नेतृत्व को पता होना चाहिए कि अमेरिका इस नरसंहार को रोकने के लिए कोई भी कदम उठा सकता है। 15 सदस्यीय सुरक्षा परिषद की इस बैठक में ईरान के उप-राजदूत ने जवाब दिया कि उनका देश टकराव नहीं चाहता, लेकिन अगर अमेरिका की ओर से कोई आक्रामक कदम उठाया गया तो ईरान जवाब देगा। अमेरिका ने ईरान सरकार की कार्रवाई पर सवाल उठाए
UN में अमेरिका के प्रतिनिधि माइक वॉल्ट्ज ने बैठक में ईरान सरकार की कार्रवाई की आलोचना की। उन्होंने कहा कि ईरान में इंटरनेट ब्लैकआउट के कारण यह पता लगाना मुश्किल हो गया है कि सुरक्षा बलों ने प्रदर्शनकारियों पर कितनी सख्ती की है। वॉल्ट्ज ने कहा, ‘ईरान सरकार का यह दावा कि हाल में हुए प्रदर्शनों के पीछे विदेशी ताकत हैं, यह दिखाता है कि ईरानी सरकार अपने ही लोगों से डर रही है। साथ ही सारा इल्जाम दूसरों के मत्थे मढ़ रही है। व्हाइट हाउस बोला- ट्रम्प के दबाव में 800 लोगों की फांसी रुकी ट्रम्प ने कई बार ईरान को चेतावनी दी थी कि अगर प्रदर्शनकारियों की हत्या जारी रही तो गंभीर परिणाम भुगतने पड़ेंगे। गुरुवार को ट्रम्प ने बताया कि हत्याएं अब कम हो रही हैं। व्हाइट हाउस ने भी पुष्टि की कि ट्रम्प के दबाव के बाद ईरान ने 800 लोगों की फांसी की योजना रोक दी है। संयुक्त राष्ट्र की सहायक महासचिव मार्था पोबी ने परिषद को बताया कि ये प्रदर्शन तेजी से फैले। इसमें काफी जान-माल का नुकसान हुआ है। मानवाधिकार संगठनों के अनुसार, अब तक 3,428 प्रदर्शनकारियों को मार डाला गया, जबकि 18,000 से ज्यादा लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। हालांकि संयुक्त राष्ट्र इन आंकड़ों की पुष्टि नहीं कर सका है। उन्होंने ईरान सरकार से अपील की है कि प्रदर्शन से जुड़े मामलों में किसी भी फांसी को रोका जाए। सभी मौतों की पारदर्शी जांच हो और कैदियों के साथ मानवीय व्यवहार किया जाए। ईरान का जवाब: टकराव नहीं चाहते, लेकिन हमला हुआ तो कार्रवाई करेंगे सुरक्षा परिषद की बैठक में ईरान ने अमेरिकी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया। संयुक्त राष्ट्र में ईरान के उप राजदूत गुलाम हुसैन दर्जी ने कहा कि अमेरिका गलत जानकारी फैला रहा है और जानबूझकर अशांति को हिंसा की ओर मोड़ रहा है। दर्जी ने सुरक्षा परिषद से कहा कि ईरान न तो तनाव बढ़ाना चाहता है और न ही टकराव चाहता है। दर्जी ने चेतावनी दी कि ‘किसी भी तरह की कार्रवाई का निर्णायक और कानूनी जवाब दिया जाएगा।’ उन्होंने कहा कि यह धमकी नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत दिया गया बयान है। ईरानी राजदूत ने आरोप लगाया कि अमेरिका मानवाधिकारों की आड़ में शासन बदलने और हमला करने की तैयारी कर रहा है। उन्होंने अमेरिका में हुए मानवाधिकार उल्लंघनों का भी जिक्र किया, जिसमें मिनेसोटा राज्य में एक इमिग्रेशन अधिकारी ने रेनी गुड की हत्या को गोली मार दी थी। रूस बोला- अमेरिका ईरान के आंतरिक मामलों में दखल दे रहा
रूस ने अमेरिका की आलोचना की। संयुक्त राष्ट्र में रूसी राजदूत वासिली नेबेंजिया ने कहा कि अमेरिका इस बैठक का इस्तेमाल ईरान के आंतरिक मामलों में दखल और आक्रामकता को सही ठहराने के लिए कर रहा है। नेबेंजिया ने चेतावनी दी कि सैन्य कार्रवाई से हालात और बिगड़ सकते हैं और पूरा क्षेत्र खून-खराबे में डूब सकता है, जिसका असर आसपास के दूसरे देशों पर भी पड़ेगा। रूस ने संयुक्त राष्ट्र के सभी 193 सदस्य देशों से बड़े टकराव को रोकने की अपील की। वहीं फ्रांस और ब्रिटेन ने ईरान की कार्रवाई को क्रूर बताया। फ्रांस के राजदूत जेरोम बोनाफोंट ने कहा कि प्रदर्शनकारियों पर हो रहे दमन की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर निंदा होनी चाहिए। उन्होंने ईरान नए प्रतिबंधों की चेतावनी दी। अमेरिका ने ईरानी नेतृत्व पर नए प्रतिबंध लगाए बैठक के साथ ही अमेरिका ने ईरान के शीर्ष नेतृत्व पर नए प्रतिबंधों का ऐलान किया। ट्रम्प प्रशासन ने 18 ईरानी व्यक्तियों और संस्थाओं के खिलाफ नए प्रतिबंधों लगाए हैं। इनमें ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के सचिव अली लारीजानी और कई अन्य अधिकारी शामिल हैं। अमेरिका का कहना है कि ये वही लोग हैं, जिन्होंने प्रदर्शनों पर क्रूर कार्रवाई की योजना बनाई। अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने इसकी घोषणा करते हुए कहा, ‘राष्ट्रपति ट्रम्प ईरान के लोगों के साथ खड़े हैं और उन्होंने वित्त मंत्रालय को प्रतिबंध लगाने का आदेश दिया है।’ ईरान पहले से ही कड़े अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों का सामना कर रहा है, जिससे उसकी अर्थव्यवस्था और ज्यादा कमजोर हुई है। इसी आर्थिक संकट को मौजूदा विरोध-प्रदर्शनों की बड़ी वजह माना जा रहा है। ईरान में इतिहास का सबसे लंबा डिजिटल ब्लैकआउट साइबर सुरक्षा निगरानी संस्था नेट ब्लॉक ने बताया है कि ईरानी सरकार ने 8 जनवरी से देश भर में इंटरनेट की लगभग पूरी पहुंच बंद कर दी है। यह डिजिटल ब्लैकआउट अब एक सप्ताह से ज्यादा (16 जनवरी 2026 तक 180 घंटे से अधिक) चल रहा है। यह ईरान के इतिहास में अब तक के सबसे लंबे डिजिटल ब्लैकआउट में से एक है। यह इंटरनेट कट पूरे देश में लागू है, जिसमें तेहरान, इस्फहान, शिराज, केरमानशाह और कई अन्य शहर शामिल हैं। कनेक्टिविटी सामान्य स्तर से घटकर महज 1% या उससे भी कम रह गई है। घरेलू नेटवर्क भी प्रभावित हैं। इससे फोन लाइनें, मोबाइल इंटरनेट, सोशल मीडिया और वेबसाइट्स तक पहुंच लगभग बंद हो गई है। नेट ब्लॉक ने इसे डिजिटल ब्लैकआउट कहा है और बताया कि यह विरोध प्रदर्शनों को निशाना बनाने वाली बढ़ती डिजिटल सेंसरशिप का हिस्सा है। इससे लोगों को एक-दूसरे से संपर्क करने, घटनाओं की जानकारी साझा करने और दुनिया को दमन की सच्चाई दिखाने का अधिकार छीन लिया गया है। विशेषज्ञों का कहना है कि इससे 9 करोड़ से ज्यादा ईरानी लोग दुनिया से कट गए हैं।


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