देवरिया के तहसील क्षेत्र के पड़री गजराज गांव में फर्जी दस्तावेजों के जरिए वरासत दर्ज कराने के मामले में प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई की है। राजस्व निरीक्षक धर्मप्रकाश सिंह को निलंबित कर दिया गया है, जबकि कुल छह लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है। इससे पहले जांच में दोषी पाए जाने पर तत्कालीन लेखपाल अजय कुमार यादव को भी सस्पेंड किया जा चुका है। मामला तब सामने आया जब ग्राम प्रधान इंदू देवी के पति रामप्रताप ने वरासत के लिए आवेदन किया। शुरुआती जांच में ही दस्तावेजों में गड़बड़ी के संकेत मिले। इंटर कॉलेज के प्रबंधक शैलेंद्र कुमार सिंह ने 24 फरवरी को जिलाधिकारी दिव्या मित्तल से इसकी शिकायत की थी। एसडीएम की अगुवाई में जांच, रिपोर्ट में गड़बड़ी की पुष्टि शिकायत की गंभीरता को देखते हुए जिलाधिकारी के निर्देश पर एसडीएम दिशा श्रीवास्तव के नेतृत्व में जांच टीम गठित की गई। टीम ने 26 और 27 फरवरी को मौके पर पहुंचकर अभिलेखों की जांच की। 9 मार्च को सौंपी गई रिपोर्ट में वरासत को विवादित और संदिग्ध बताया गया। जांच में लेखपाल, राजस्व निरीक्षक और आवेदनकर्ता की भूमिका संदिग्ध पाई गई। बैंक ट्रांजैक्शन भी जांच के घेरे में जांच के दौरान कुछ बैंक लेनदेन भी संदेह के घेरे में आए हैं। तहरीर के मुताबिक, माया देवी के खाते में रकम आने के बाद 11 जुलाई 2025 को 15 लाख रुपए रामप्रताप के खाते में और 8 लाख रुपए सफाईकर्मी रामराज प्रसाद के खाते में ट्रांसफर किए गए। इसके बाद 17 जुलाई को रामराज के खाते से 7 लाख रुपए राहुल प्रताप सिंह के खाते में भेजे गए। एक लाख रुपए के नकद लेनदेन की बात भी सामने आई है। दोषियों पर होगी सख्त कार्रवाई प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लेते हुए कड़ी कार्रवाई शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि जांच में जो भी दोषी पाए जाएंगे, उनके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

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