बदायूं के एचपीसीएल प्लांट में हुए दोहरे हत्याकांड के बाद लापरवाही के आरोप में सस्पेंड किए गए तत्कालीन एसएचओ अजय कुमार और दरोगा धर्मेंद्र कुमार पर विभागीय जांच शुरू हो गई है। सीओ सिटी रजनीश उपाध्याय ने दोनों को नोटिस जारी कर बयान दर्ज कराने को कहा है। माना जा रहा है कि इन बयानों से यह खुलासा हो सकता है कि आरोपी के खिलाफ समय रहते कार्रवाई क्यों नहीं की गई। मामले में यह भी अटकलें हैं कि स्थानीय विधायक के दबाव को गंभीरता से लिया गया और इस वजह से आरोपी पर कार्रवाई टाली गई। साथ ही, उच्च अधिकारियों से भी कई अहम बातें छिपाए जाने की बात सामने आ रही है। जांच में इन पहलुओं पर खास फोकस रहेगा। आरोपी की सत्ता से लेकर प्लांट तक पकड़ सूत्रों के मुताबिक सैजनी गांव निवासी अजय प्रताप ने सत्ता, प्रशासन और पुलिस तक मजबूत पकड़ बना रखी थी। उसके ताऊ, पूर्व प्रधान राकेश सिंह पर भी करोड़ों की सरकारी संपत्ति पर कब्जे के आरोप हैं। बताया जा रहा है कि सत्ताधारियों की सरपरस्ती में परिवार का प्रभाव लगातार बढ़ता गया। कर्मचारियों से आधी सैलरी लेने के आरोप एचपीसीएल प्लांट में अजय प्रताप और उसके भाई केशव का दबदबा बताया जा रहा है। आरोप है कि प्लांट में किसे नौकरी मिलेगी, यह उनके इशारे पर तय होता था। कुछ कर्मचारियों से आधी सैलरी लेने और बिना ड्यूटी के नाम पर पैसा वसूलने के भी आरोप लगे हैं। हालांकि कर्मचारी अभी खुलकर सामने आने से बच रहे हैं। कार्रवाई न होने पर उठे सवाल, जांच तेज मुकदमा दर्ज होने के बावजूद आरोपी के खिलाफ सख्त कार्रवाई नहीं हो सकी। उल्टा, थाने में उसे सम्मान मिलने की बातें भी सामने आई हैं। अब इस नरम रवैये को लेकर संबंधित पुलिसकर्मियों की भूमिका जांच के दायरे में है। सीओ सिटी ने बताया कि नोटिस जारी कर दिए गए हैं और जांच को आगे बढ़ाया जा रहा है। प्लांट में फिर से होगी भर्ती हत्याकांड के बाद प्लांट का माहौल भयभीत हो गया है। स्थानीय कर्मचारी काम पर आने से कतरा रहे हैं, जबकि अजय प्रताप की सिफारिश पर लगे कर्मचारी भी अनुपस्थित हैं। ऐसे में प्लांट संचालन को सुचारू रखने के लिए दोबारा भर्ती की तैयारी की जा रही है।

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