रवीन्द्रालय चारबाग में चल रहे लखनऊ पुस्तक मेले का उत्साह अपने चरम पर है। मेले के नौवें दिन ईद के अवकाश का स्पष्ट असर दिखा, जहां पुस्तक प्रेमियों की भारी भीड़ उमड़ी। देर रात तक मेले में रौनक बनी रही और हर स्टॉल पर पाठकों की चहल-पहल देखी गई। यह मेला अब अपने अंतिम पड़ाव पर है और कल इसका समापन होगा। साहित्यिक मंच पर दिनभर विभिन्न गतिविधियां जारी रहीं, जिनमें विचार-विमर्श, पुस्तक विमोचन और सांस्कृतिक कार्यक्रम शामिल थे। अंतरराष्ट्रीय पुतुल दिवस के अवसर पर काफिला नाट्य संस्थान के कलाकारों ने मेराज आलम के निर्देशन में कठपुतली का आकर्षक प्रदर्शन किया। इस प्रस्तुति ने बच्चों और बड़ों दोनों को मंत्रमुग्ध कर दिया। पारंपरिक कठपुतली कलाकार नौशाद की प्रस्तुति भी विशेष आकर्षण का केंद्र रही। लेखन के स्वरूप पर अपने विचार व्यक्त किए इसी कड़ी में ‘कलम से कम्प्यूटर’ विषय पर एक परिचर्चा आयोजित की गई। इसमें डॉ. सुधाकर अदीब ने बदलते समय में लेखन के स्वरूप पर अपने विचार व्यक्त किए। उन्होंने पारंपरिक लेखन और डिजिटल माध्यमों के बीच संतुलन स्थापित करने की आवश्यकता पर बल दिया। मेले में कई महत्वपूर्ण पुस्तकों का विमोचन भी किया गया। रमाकांत श्रीवास्तव स्मृति संस्थान द्वारा ‘नमन के भाव सुमन’ और ‘रससिद्ध कवि क्रांतिकारी हितैषी’ का लोकार्पण हुआ। इसके अतिरिक्त, मिथिलेश दीक्षित की पुस्तक ‘मेरा साक्षात्कार’ का भी विमोचन किया गया। इस अवसर पर अमिता दुबे, अलका प्रमोद, करुणा पांडेय, सुशील अवस्थी और विनय श्रीवास्तव सहित कई साहित्यकार उपस्थित थे। ये रहे मौजूद प्रोफेसर नरेशचंद्र त्रिपाठी की पुस्तक ‘एक राम अनेक आयाम’ का विमोचन भी हुआ। इस दौरान विद्या विंदु सिंह, दयानंद पांडेय, विशम्भर शुक्ल, उमाशंकर शुक्ल शितिकण्ठ, प्रद्युम्न तिवारी और विनय दास ने अपने विचार साझा किए। आलोक दुबे के कथा संग्रह का लोकार्पण भी मेले के प्रमुख आकर्षणों में से एक रहा।

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