आईआईटी कानपुर का कैंपस इन दिनों भविष्य की तकनीक और युवाओं के जोश से सराबोर है। वार्षिक महोत्सव ‘टेककृति’26’ के तीसरे दिन नवाचार, रफ्तार और मनोरंजन का ऐसा संगम दिखा कि हर कोई दंग रह गया। दिन की शुरुआत जहां गंभीर तकनीकी चर्चाओं से हुई, वहीं शाम होते-होते पूरा परिसर रॉक बैंड की धुनों पर थिरकने लगा। सुबह से लेकर देर रात तक चले आयोजनों में देश के कोने-कोने से आए छात्रों ने अपना हुनर दिखाया। तीसरे दिन का सबसे प्रभावशाली सत्र एयर मार्शल बालाकृष्णन मणिकांतन का रहा। सेंट्रल एयर कमांड के ऑफिसर इन चीफ ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के जरिए भारतीय वायु सेना की जांबाजी के किस्से साझा किए। उन्होंने किताबी बातों के बजाय वास्तविक मिशनों की चुनौतियों, सटीक रणनीति और नेतृत्व के पीछे की अनकही कहानियाँ सुनाईं। उनके सत्र ने युवाओं में देशभक्ति और साहस का नया संचार किया। अब खुद फैसले लेगा कंप्यूटर, एआई की नई दुनिया तकनीक के शौकीनों के लिए एडब्ल्यूएस (AWS) की मौना नीलकंठा का सत्र काफी खास रहा। उन्होंने ‘एजेंटिक एआई’ की अवधारणा को समझाते हुए बताया कि भविष्य का एआई सिर्फ सवालों के जवाब नहीं देगा, बल्कि वह खुद फैसले लेने और समस्याओं को हल करने में सक्षम होगा। उन्होंने बताया कि कैसे एआई अब इंसानों की तरह चीजों को याद रखकर खुद दिशा तय कर सकेगा, जो भविष्य की तकनीक के लिए एक बड़ा बदलाव है। ट्रैक पर दिखी रफ्तार, छात्रों ने खुद तैयार कीं ‘ग्रॉ प्री’ कारें मैदान पर सबसे ज्यादा रोमांच ‘टेककृति ग्रॉ प्री’ प्रतियोगिता में देखने को मिला। यह एक आरसी (रिमोट कंट्रोल) कार रेस थी, लेकिन खास बात यह थी कि इसमें इस्तेमाल होने वाली आईसी इंजन कारों को छात्रों ने खुद डिजाइन और असेंबल किया था। उबड़-खाबड़ और चुनौतीपूर्ण ट्रैकों पर जब ये कारें दौड़ीं, तो दर्शकों की सांसें थम गईं। इसके अलावा हैकाथॉन और स्ट्रैटेजी स्प्रिंट जैसी प्रतियोगिताओं में भी युवाओं ने अपने इंजीनियरिंग कौशल का लोहा मनवाया। रॉक नाइट में जमकर झूमे छात्र
दिनभर की दिमागी कसरत और प्रतियोगिताओं के बाद शाम का नजारा बिल्कुल अलग था। प्रोनाइट ग्राउंड पर ‘ओमकार बैंड’ की ऊर्जावान प्रस्तुति ने समां बांध दिया। रॉक संगीत की धुनों पर छात्र देर रात तक झूमते रहे। बैंड के बाद अंकित और एचआर कलाकारों की प्रस्तुतियों ने माहौल को और भी रंगीन बना दिया। इस तरह टेककृति का तीसरा दिन ज्ञान, प्रतिस्पर्धा और जश्न के एक बेहतरीन पैकेज के रूप में यादगार बन गया।

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