मध्य-पूर्व देशों में चल रहे युद्ध का असर अब सीधे जूता बाजार पर दिखाई देने लगा है। युद्ध के कारण कच्चे माल की कीमतें बढ़ने से जूतों के दाम 10 से 20 प्रतिशत तक बढ़ गए हैं। उद्योग से जुड़े व्यापारियों ने इसे लेकर चिंता जताई है और समाधान के लिए बैठक की। द आगरा शू फैक्टर्स फेडरेशन और भीम युवा व्यापार मंडल की संयुक्त बैठक में बताया गया कि जूते बनाने में इस्तेमाल होने वाले करीब 34 तरह के कच्चे माल में से ज्यादातर क्रूड ऑयल से जुड़े हैं। युद्ध के चलते तेल की कीमतों में उछाल आया है, जिसका सीधा असर इन कच्चे माल पर पड़ा है। फेडरेशन के अध्यक्ष विजय सामा ने कहा कि कच्चे माल की बढ़ती कीमतों से छोटे उद्योग सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं। कई छोटे कारखाने बंद होने की कगार पर हैं। एलपीजी की कमी के कारण उत्पादन प्रक्रिया भी प्रभावित हो रही है। व्यापार मंडल के अध्यक्ष प्रदीप कुमार पिप्पल ने कहा कि इस मुश्किल समय में सभी व्यापारियों को एकजुट रहना होगा। उन्होंने बड़े व्यापारियों से अपील की कि वे संकट में मुनाफाखोरी न करें और पुराने स्टॉक को पुरानी कीमतों पर ही बेचें। व्यापारियों के अनुसार, जो जूते पहले 250 रुपए में मिलते थे, उनकी कीमत अब करीब 290 रुपए तक पहुंच गई है। इससे आम उपभोक्ताओं पर भी सीधा असर पड़ेगा। जूता बनाने में प्रयोग कच्चे माल की बढ़ी कीमत पॉलीथिन: 140 से बढ़कर 210 रुपए प्रति किलो
कुशन फोम: 300 से बढ़कर 400 रुपए प्रति किलो
ईवीए शीट: 50 से बढ़कर 55 रुपए प्रति पीस
पीवीसी फोम: 250 से बढ़कर 300 रुपए
एयरमिक सोल: 70 से बढ़कर 75 रुपए प्रति जोड़ी
पीयू सोल: 100 से बढ़कर 110 रुपए प्रति जोड़ी
टीपीआर सोल: 100 से बढ़कर 110 रुपए प्रति जोड़ी
पीयू एडहेसिव: करीब 10% बढ़कर महंगा हुआ

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