प्रयागराज के मुट्ठीगंज थाना क्षेत्र स्थित ऐतिहासिक कालीबाड़ी मंदिर परिसर से आधा दर्जन परिवारों को जबरन बेघर करने का मामला सामने आया है। पीड़ितों का आरोप है कि मंदिर समिति ने बिना किसी पूर्व सूचना के पुलिस और प्रशासन की मदद से उनका घरेलू सामान घर से बाहर सड़क पर फेंक दिया, जिसके बाद ये परिवार खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर हैं। बेघर किए गए कन्हैया लाल तिवारी, गीता देवी और मनोज कुमार गुप्ता समेत अन्य पीड़ितों ने प्रेस क्लब में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में अपनी आपबीती सुनाई। उन्होंने बताया कि वे और उनके पूर्वज कई पीढ़ियों से मंदिर परिसर में रह रहे थे। इनमें से कुछ परिवार मंदिर समिति के कर्मचारी भी हैं, जिन्हें समिति द्वारा ही आवास उपलब्ध कराए गए थे।
पीड़ितों का दावा है कि यह पूरा मामला अभी न्यायालय में विचाराधीन है। इसके बावजूद, कालीबाड़ी मेंटेनेंस समिति के सचिव, उपाध्यक्ष और कोषाध्यक्ष ने कथित तौर पर दबंगई दिखाते हुए यह कार्रवाई की। आरोप है कि नायब तहसीलदार और स्थानीय पुलिस की मिलीभगत से उनका सामान जबरन सड़क पर फेंका गया। पीड़ितों ने आरोप लगाया कि उन्हें न तो कोई पूर्व सूचना या नोटिस दिया गया और न ही अपना पक्ष रखने का मौका मिला। बेघर होने के बाद अब ये परिवार दर-दर की ठोकरें खा रहे हैं और लगातार धमकियां मिलने का भी दावा कर रहे हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप कर न्याय दिलाने की मांग की है। प्रशासनिक उपेक्षा से नाराज इन परिवारों ने अब आर-पार की लड़ाई का मन बना लिया है। पीड़ितों ने चेतावनी दी है कि यदि उन्हें न्याय नहीं मिला और उनके आवास वापस नहीं किए गए, तो वे शनिवार से कालीबाड़ी मंदिर परिसर में ही ‘क्रमिक अनशन’ शुरू करेंगे। मनोज कुमार गुप्ता ने स्पष्ट कहा कि न्याय न मिलने पर वे अपनी जान दे देंगे।

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