प्रयागराज में शिया समुदाय ने ईद-उल-फित्र का त्योहार इस बार सादगी और विरोध के साथ मनाया। ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनाई के करीबियों, सैकड़ों मासूमों के नरसंहार और हालिया शहीदों के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए अधिकांश लोगों ने अपनी बाहों पर काली पट्टी बांधकर नमाज़ अदा की। इस वर्ष ईद के पारंपरिक रंग फीके रहे। विरोध और शोक के कारण बड़ी संख्या में लोगों ने नए कपड़े नहीं पहने। घरों में ईद की मशहूर सिवइयां और अन्य पकवान नहीं बनाए गए। महिलाओं ने भी चूड़ियां नहीं पहनीं और न ही कोई श्रृंगार किया।
उम्मुल बनीन सोसायटी के महासचिव सैय्यद मोहम्मद अस्करी के अनुसार, शहर की 300 से अधिक मस्जिदों और ईदगाहों में नमाज़ अदा की गई। मस्जिद क़ाज़ी साहब में मौलाना सैय्यद जव्वादुल हैदर रिज़वी ने इमामत की। खुत्बे के दौरान मौलाना रिज़वी ने कहा, “हम अल्लाह के हुक्म पर ईद की नमाज़ तो पढ़ रहे हैं, लेकिन हमारे दिल गमजदा हैं। जब मासूमों और बेगुनाहों का कत्लेआम हो रहा हो, तो जश्न कैसा। मस्जिद के मोतवल्ली शाहरुख क़ाज़ी ने कहा, सरों को देने से फुर्सत मिले तो ईद भी हो, मेरे कबीले का हर शख्स कत्लगाह में है। शिया जामा मस्जिद में मौलाना सैय्यद हसन रज़ा ज़ैदी की अगुवाई में नमाज़ अदा की गई। चौक जामा मस्जिद में भीड़ अधिक होने के कारण दो बार नमाज़ हुई। रानी मंडी, करेली, दरियाबाद, रोशन बाग, अटाला और सिविल लाइंस की मस्जिदों में भी सादगी से नमाज़ संपन्न हुई। नमाज़ के बाद देश की सलामती और अमन-चैन की दुआ मांगी गई। इस दौरान इज़राइल और अमेरिका की नीतियों के खिलाफ जमकर नारेबाजी भी हुई। समुदाय ने यह संदेश दिया कि जब तक मानवता लहूलुहान है, उनके लिए त्योहार केवल एक इबादत है, उत्सव नहीं।

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