बाराबंकी जिले के किंतूर गांव में इस बार ईद का त्योहार नहीं मनाया जाएगा। ईरान के सर्वोच्च नेता आयतुल्लाह अली खामेनेई के निधन के दावों के बाद गांव में शोक का माहौल है, जिसके चलते उनके वंशजों ने ईद न मनाने का फैसला किया है। किंतूर गांव का ईरान से गहरा ऐतिहासिक संबंध है। यह गांव ईरान के पहले सर्वोच्च नेता आयतुल्लाह रुहोल्लाह मुसावी खुमैनी का पैतृक निवास स्थान माना जाता है। आयतुल्लाह खुमैनी के दादा, सैयद अहमद मुसावी, का जन्म इसी किंतूर गांव में हुआ था। लगभग 1830 के दशक में वे धार्मिक शिक्षा के लिए भारत छोड़कर पहले इराक और फिर 1834 में ईरान के खोमेन शहर में बस गए थे। भारत से अपने जुड़ाव को बनाए रखने के लिए उन्होंने अपने नाम के साथ ‘हिंदी’ शब्द जोड़ा था। ईरान में उनके परिवार को आज भी ‘अल-मुसावी अल-हिंदी’ के नाम से जाना जाता है। हालांकि, वर्तमान रिपोर्टों के अनुसार, आयतुल्लाह अली खामेनेई का किंतूर से सीधा खून का रिश्ता होने पर मतभेद हैं। फिर भी, वे खुमैनी के प्रमुख शिष्यों में से एक थे और उनकी विरासत इस गांव से जुड़ी थी। मार्च 2026 में इजरायली हमले के दावों के बीच ईरान के सर्वोच्च नेता अली खामेनेई की मृत्यु की खबरों के बाद, किंतूर गांव में गहरा शोक देखा गया। यहां के लोग उन्हें अपना आध्यात्मिक रहबर और अपनी मिट्टी से जुड़ा मानते हैं। गांव के वंशजों ने बातचीत के दौरान पुष्टि की कि वे इस बार ईद नहीं मनाएंगे। बाराबंकी का यह छोटा सा गांव आज भी ईरान की 1979 की इस्लामी क्रांति के नायकों की विरासत का प्रतीक बना हुआ है।

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