कानपुर के घाटमपुर नगर समेत आसपास क्षेत्र में ईद का त्योहार धूमधाम के साथ मनाया गया। ईद मुस्लिम धर्म का सबसे बड़ा पर्व होता है। यह पर्व आपसी भाईचारे का प्रतीक है। लोग इस पर्व में एक दूसरे को गले लगाकर ईद की बधाइयां देते है। मस्जिद और ईदगाह में नियमित समय से नमाज सम्पन्न हुई। घाटमपुर नगर स्थित ईदगाह में लोगों में एक दूसरे को ईद की मुबारकबाद दी। इसी क्रम में घाटमपुर, सजेती, बिधनू क्षेत्र के रमईपुर, मझावन, सेनपश्चिम पारा, रेऊना में ईद का त्योहार हर्ष उल्लास के साथ मनाया गया। घाटमपुर शहर काजी सरताज रजा ने बताया कि, मक्का से मोहम्मद पैगंबर के प्रवास के बाद पवित्र शहर मदीना में ईद-उल-फितर का उत्सव शुरू हुआ। कहा जाता है कि पैगम्बर हजरत मुहम्मद ने बद्र की लड़ाई में जीत हासिल की थी। इस जीत की खुशी में सभी का मुंह मीठा करवाया गया था, इसी दिन को मीठी ईद या ईद-उल-फितर के रुप में मनाया जाता है। ईद का त्योहार लोग बड़े ही धूमधाम से मनाते हैं। इस दिन हर घर में सेवइयों बनती है और तरह-तरह के पकवानों के साथ मेहमानों का स्वागत किया जाता है और ईद के चांद के सामने दुआएं पढ़ी जाती हैं। यह पर्व अमन-चैन और सौहार्द का संदेश देता है इस खास दिन का हर मुस्लिम को इंतजार रहता है। सभी अपने प्रियजनों से गले लग उन्हें ईद की मुबारकबाद देते हैं। साथ ही, पुराने गिले-शिकवे भी मिटा देते हैं। ईद का त्योहार सामाजिक एकता को मजबूत करने के साथ ही आपसी भाईचारे की भावना को बढ़ाता है। यह पर्व अमन-चैन और सौहार्द का संदेश देता है। ईद की नमाज अदा करते हैं और स्वादिष्ट व्यंजन बनाते हैं ईद का त्योहार साल में रमज़ान के महीने के बाद आता है और इस दिन का मुस्लिम धर्म के लोग बड़ी बेसब्री से इंतजार करते हैं। क्योंकि यह त्योहार रमजान के पूरे महीने रोजे रखने, अल्लाह की इबादत करने के बाद नसीब होता है। इस दिन सभी लोग नए-नए कपड़े पहनते हैं, ईद की नमाज़ अदा करते हैं और स्वादिष्ट व्यंजन बनाते हैं।

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