चैत्र नवरात्र के तीसरे दिन शनिवार को शीतला धाम में मां चंद्रघंटा की विशेष पूजा-अर्चना की गई। इस अवसर पर मंदिर को केतकी और गेंदे के फूलों तथा धानी रंग की चुनरी से सजाया गया था। भोर से ही माता रानी के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। मंदिर के कपाट खुलने के बाद सुरेश माली ने माता रानी की आरती उतारी। इसके बाद श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लग गईं, जिन्होंने बारी-बारी से मां के दर्शन किए। आजमगढ़ और भदोही सहित विभिन्न स्थानों से आए सैकड़ों श्रद्धालुओं ने मां के दर्शन के उपरांत धाम में बने खंभों पर अपनी मन्नतें मांगते हुए रक्षा सूत्र बांधे। मंदिर के महंत विवेकानंद पंडा ने बताया कि मां दुर्गा के तीसरे स्वरूप मां चंद्रघंटा की पूजा की जाती है। यह देवी साधकों को धैर्य, शक्ति और धन की शांति प्रदान करती हैं। उनके मस्तक पर अर्धचंद्र घंटी के समान सुशोभित होता है, जिसके कारण उन्हें चंद्रघंटा कहा जाता है। महंत ने आगे बताया कि उनका रूप अत्यंत तेजस्वी और शक्तिशाली है, जो युद्ध की मुद्रा में होता है। मां के दस हाथों में विभिन्न हथियार और कमल का फूल होता है, और उनका वाहन सिंह है, जो साहस और वीरता का प्रतीक है। दर्शन-पूजन के बाद स्थानीय महिलाओं ने देवी गीत और पचरा गाकर पूरे माहौल को भक्तिमय बना दिया। जय नारायण पंडा ने जानकारी दी कि लगभग 15 हजार श्रद्धालुओं ने मां के दर्शन किए। सुरक्षा व्यवस्था के कड़े इंतजाम किए गए थे।

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