बाराबंकी जिले में अफीम की लाइसेंसी खेती किसानों के लिए आय का मजबूत स्रोत बनकर उभरी है। देश-विदेश में इसकी बढ़ती मांग के चलते किसानों को अच्छा मुनाफा मिल रहा है। इस बार हरख ब्लॉक क्षेत्र में अफीम का रिकॉर्ड उत्पादन दर्ज किया गया है। हरख ब्लॉक के किसान राम लखन के अनुसार, अफीम की फसल करीब 4 से 5 महीने में तैयार हो जाती है। हालांकि यह खेती लाभदायक है, लेकिन इसमें काफी मेहनत और सतर्कता की जरूरत होती है। राम लखन बताते हैं कि पहली बार अफीम की खेती करने वाले किसानों को शुरुआती दौर में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। लेकिन अनुभव बढ़ने के साथ उत्पादन में भी सुधार होता जाता है और लाभ बढ़ता है। लाइसेंस सिस्टम के तहत होती है खेती जिला कृषि विभाग के मुताबिक, अफीम की खेती पूरी तरह से लाइसेंस प्रणाली के अंतर्गत होती है। नारकोटिक्स विभाग द्वारा जारी लाइसेंस में उत्पादन की निश्चित मात्रा और समय-सीमा तय होती है। किसानों को निर्धारित मात्रा में ही अफीम का उत्पादन जमा करना अनिवार्य होता है। नुकसान हुआ तो लाइसेंस रद्द होने का खतरा अगर मौसम खराब हो जाए, फसल में कीट-रोग लग जाएं, जानवर नुकसान पहुंचाएं या चोरी हो जाए, तो उत्पादन प्रभावित होता है। ऐसी स्थिति में किसानों के सामने लाइसेंस निरस्त होने का खतरा बना रहता है। अफीम की ऊंची कीमत जहां किसानों के लिए फायदा है, वहीं यह एक बड़ी चुनौती भी है। किसानों का कहना है कि फसल पर चोरों और असामाजिक तत्वों की नजर रहती है। चुनौतियों के बावजूद मजबूत हो रही आर्थिक स्थिति इसी कारण उन्हें दिन-रात खेतों की रखवाली करनी पड़ती है, जिससे मेहनत और जिम्मेदारी दोनों बढ़ जाती हैं। इन तमाम चुनौतियों के बावजूद अफीम की खेती किसानों के लिए लाभदायक साबित हो रही है। फसल तैयार होने पर अच्छा प्रतिफल मिलता है, जिससे किसानों की आर्थिक स्थिति में सुधार आ रहा है।

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