इटावा के सैफई आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय के मानसिक रोग विभाग में भर्ती मूक-बधिर और मानसिक रूप से असहाय करीब 40 वर्षीय महिला के साथ दुष्कर्म का सनसनीखेज मामला सामने आया है। करीब 9 महीनों से भर्ती महिला के 5 माह की गर्भवती होने पर घटना का खुलासा हुआ। महिला 24 जून 2025 से अस्पताल में भर्ती थी। वह बोलने और सुनने में असमर्थ है, साथ ही मानसिक रूप से अस्वस्थ होने के कारण संवाद नहीं कर पा रही है। नियमित जांच के दौरान डॉक्टरों को गर्भावस्था का पता चला, जिसके बाद हड़कंप मच गया। आरोपी सफाईकर्मी गिरफ्तार, जेल भेजा गया मामले में विभागाध्यक्ष डॉ. अरुण कुमार मिश्रा की तहरीर पर सैफई थाने में एफआईआर दर्ज की गई। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपी सफाईकर्मी रविंद्र को गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ के बाद उसे न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया है। पुलिस अब यह भी जांच कर रही है कि कहीं इस घटना में अन्य किसी की संलिप्तता तो नहीं है। CCTV बंद, सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल जांच में सामने आया कि जिस वार्ड में महिला भर्ती थी, वहां CCTV कैमरे बंद थे। इतने संवेदनशील विभाग में निगरानी व्यवस्था का ठप होना बड़ी लापरवाही माना जा रहा है। इससे अस्पताल प्रशासन और सुरक्षा तंत्र दोनों की जिम्मेदारी पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। 13 कर्मचारी हटाए गए, जांच कमेटी गठित मामले की गंभीरता को देखते हुए अस्पताल प्रशासन ने विभागाध्यक्ष समेत 13 कर्मचारियों को हटा दिया है। साथ ही निष्पक्ष जांच के लिए कई कर्मचारियों का तबादला भी किया गया है। पूरे प्रकरण की जांच के लिए एक कमेटी गठित की गई है, जो सुरक्षा व्यवस्था, कर्मचारियों की भूमिका और संभावित लापरवाही की जांच कर रही है। बयान दर्ज कराने के लिए तकनीकी मदद की मांग मूक-बधिर और मानसिक रूप से असमर्थ पीड़िता का बयान दर्ज कराने के लिए पुलिस ने न्यायालय से विशेष तकनीकी विशेषज्ञ की मांग की है। इसके अलावा आरोपी और पीड़िता के डीएनए सैंपल लेने की प्रक्रिया भी शुरू की गई है, ताकि वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर केस को मजबूत किया जा सके। आरोपी की पत्नी ने लगाए मारपीट के आरोप मामले में नया मोड़ तब आया जब आरोपी रविंद्र की पत्नी पूनम ने आरोप लगाया कि उसके पति को फंसाया गया है। उसका कहना है कि 18 मार्च को उसे हिरासत में लेकर मारपीट की गई, भूखा-प्यासा रखा गया और धमकाकर जुर्म कबूल करवाया गया। उन्होंने विभागाध्यक्ष पर भी गंभीर आरोप लगाते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की है। राजनीतिक बयानबाजी से गरमाया मामला घटना के बाद मामला राजनीतिक रंग भी ले चुका है। अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया के जरिए प्रदेश सरकार और स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने संविदा कर्मियों की नियुक्ति और निगरानी व्यवस्था को लेकर भी कड़ी टिप्पणी की है। प्रशासन और पुलिस का पक्ष सैफई विश्वविद्यालय के प्रवक्ता डॉ. सोमेंद्र पाल सिंह के मुताबिक, 18 मार्च को मामला संज्ञान में आने के बाद तत्काल एफआईआर दर्ज कर आरोपी को गिरफ्तार किया गया। वहीं प्रभारी सीओ रामगोपाल शर्मा ने बताया कि गर्भावस्था की पुष्टि के बाद केस दर्ज हुआ और जांच में आरोपी की पहचान कर उसे जेल भेजा गया। जांच जारी, सख्त कार्रवाई का भरोसा मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस और प्रशासन दोनों स्तर पर जांच जारी है। तकनीकी और वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर केस को मजबूत किया जा रहा है। पुलिस का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो और मरीजों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।

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