कानपुर में फर्जी फर्मों के जरिए इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) घोटाले का मामला सामने आया है। मूंगफली के बिजनेस के नाम पर 2.66 करोड़ रुपये का इनपुट टैक्स क्रेडिट लिया गया था। क्राइम ब्रांच ने इस मामले में एक और आरोपी को गिरफ्तार किया है। उसे सीओडी क्रॉसिंग के पास से पकड़ा गया है। इससे पहले गिरोह के दो सदस्यों को जेल भेजा जा चुका है। पुलिस अब आरोपी से पूछताछ कर रही है। मामले में आगे की जांच जारी है। राज्य कर अधिकारियों ने दर्ज कराई थी एफआईआर डीसीपी क्राइम श्रवण कुमार सिंह ने बताया- राज्य कर विभाग ने फरवरी में कल्याणपुर थाने में फर्जी फर्मों के नाम पर आईटीसी का अवैध तरीके से लाभ लेने की एफआईआर दर्ज कराई थी। पुलिस और क्राइम ब्रांच ने अपूर्वा ट्रेडिंग कंपनी के नाम से संचालित फर्म की जांच की। उसके मेहरबान सिंह का पुरवा स्थित पते का सत्यापन कराया गया, जिसमें किसी तरह की व्यापारिक गतिविधि होते नहीं मिली थी। पुलिस को फर्म से मोबाइल नंबर भी गायब मिला था। डिजिटल साक्ष्यों के विश्लेषण से फर्म बोगस निकली, जिसके संचालको की ओर से फर्जी दस्तावेंजों के सहारे अवैध तरीके से इनपुट टैक्स क्रेडिट का लाभ लेने की जानकारी हुई। फर्म ने 2019-20 में 2.66 करोड़ का लाभ लिया। पुलिस ने कमल गौरव साहू और एतिशाम हुसैन को पहले ही जेल भेज दिया था, जबकि शुक्रवार को दीपक कुमार उर्फ मोगली को गिरफ्तार किया गया। कूटरचित डॉक्यूमेंट बनवाए डीसीपी क्राइम ने बताया- गिरोह फर्जी आधार कार्ड, पैन कार्ड, बिजली बिल, किरायानामा जैसे कूटरचित दस्तावेज तैयार कराते थे। इन के आधार पर उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र और छत्तीसगढ़ में फर्जी जीएसटी फर्मों का पंजीकरण कराया जाता था। आरोपी वास्तविक व्यापार किए बिना केवल कागजों में माल की खरीद-फरोख्त दर्शाकर फर्जी इनवॉइस एवं ई-वे बिल तैयार करते थे। इन लेन-देन के आधार पर आईटीसी का गलत तरीके से क्लेम कर सरकारी राजस्व को नुकसान पहुंचाया जाता था। गिरोह में कई लोग कमीशन के आधार पर फर्म रजिस्ट्रेशन, बैंक खाता संचालन, बिलिंग एवं रिटर्न फाइलिंग का कार्य करते थे।

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