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हमारी सरकार नहीं, फिर भी 9.5 नंबर का हकदार:दिबियापुर विधायक प्रदीप यादव बोले- अपनी निधि 100 प्रतिशत खर्च की, अहनैया-सैंगर नदी पर पुल नहीं बन सके

औरैया जिले की दिबियापुर विधानसभा सीट से समाजवादी पार्टी के विधायक प्रदीप यादव ने अपने चार साल के कार्यकाल को लेकर कहा- विपक्ष में रहने के बावजूद मैंने क्षेत्र के विकास में कोई कमी नहीं छोड़ी। सरकार में न होने के बावजूद मैंने अपनी निधि से विकास कार्य कराए। दैनिक भास्कर रिपोर्टर ने विधायक से खास बातचीत की। पढ़िए पूरा इंटरव्यू… सवाल: पिछले 4 साल के कामकाज को 10 में से कितने नंबर देंगे?
जवाब: हम सरकार में नहीं हैं। इसके बावजूद जो काम किए हैं, उसके आधार पर मैं अपने आप को 10 में से 9.5 नंबर देना चाहूंगा। सवाल: सबसे बड़ा काम कौन सा कराया है?
जवाब: बड़े काम सरकार में रहते हुए ही संभव होते हैं। पिछली बार अखिलेश यादव की सरकार में दिबियापुर क्षेत्र में कई बड़ी सड़कें बनवाई गई थीं। अछल्दा से बिधूना, अछल्दा से फफूंद और फफूंद से औरैया तक आरसीसी सड़कें बनीं। इस कार्यकाल में अछल्दा का ओवरब्रिज बन गया, लेकिन अहनैया नदी और सैंगर नदी पर पुल नहीं बन सके, जबकि ये प्रस्तावित थे। पहले के कार्यकाल में कई पुल बनवाए, जिससे किसानों को फसल ले जाने में सुविधा मिली। दिबियापुर का नहर पुल, जो काफी संकरा था, उसे भी बनवाया गया। सवाल: ऐसा कौन सा बड़ा काम है जो नहीं हो पाया?
जवाब: अहनैया नदी और सैंगर नदी पर पुल नहीं बन पाए। नई सड़कें नहीं बन सकीं, सिर्फ पुरानी सड़कों का मेंटेनेंस हुआ। पाता से हरचंदपुर तक सड़क खराब है, चमकुनी से धमसनिया तक सड़क जर्जर है। बीसलमऊ से मल्हौसी और बबीना वाली सड़क भी नहीं बन सकी, जबकि ये दो जिलों को जोड़ने वाली महत्वपूर्ण सड़कें हैं। सवाल: क्या विधायक निधि पूरी खर्च कर रहे हैं?
जवाब: हमने 100% विधायक निधि खर्च की है। गांवों में छोटी-छोटी सड़कों का निर्माण कराया, महापुरुषों और शहीदों के नाम पर गेट बनवाए, जरूरतमंद जगहों पर फ्रीजर लगवाए और गंभीर बीमार लोगों के इलाज में भी आर्थिक मदद दी। सवाल: क्या इस बार भी आप टिकट के दावेदार हैं?
जवाब: 2027 में हम उम्मीदवार रहेंगे। हम शुरू से पार्टी के साथ हैं और पार्टी को हम पर पूरा विश्वास है। सवाल: विधानसभा में स्पीकर सतीश महाना के साथ आपकी बातचीत अक्सर वायरल होती है, क्या बाहर भी ऐसा ही रहता है? जवाब: वह विधानसभा के स्पीकर हैं और हम उनका पूरा सम्मान करते हैं। सदन में जनता की आवाज उठाना हमारी जिम्मेदारी है। एक कहावत है कि जब तक बच्चा रोता नहीं, मां भी दूध नहीं पिलाती। अगर हम जनता की बात नहीं रखेंगे तो कैसे काम होगा। हम अपनी बात मजबूती से रखते हैं, इसे कोई व्यंग समझे या कुछ और, लेकिन स्पीकर भी हमारी भावना को समझते हैं।

Source: Dainik Bhaskar via DNI News (Prayagraj)

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