हरदोई में 27 साल पुराने मारपीट के एक मामले में अपर सिविल जज जूनियर डिवीजन (कोर्ट संख्या 5) साक्षी चौधरी ने तीन आरोपियों को सजा सुनाई है। इनमें एक पिता और उसका पुत्र शामिल हैं। न्यायालय ने सभी आरोपियों को छह महीने तक प्रोबेशन अधिकारी के समक्ष हाजिरी लगाने का आदेश दिया है। इस अवधि के दौरान आरोपियों को सदाचारी रहना होगा और कोई भी अपराध नहीं करना होगा। न्यायालय ने चेतावनी दी है कि यदि इस शर्त का उल्लंघन किया जाता है, तो उन्हें दंडित किया जाएगा। यह मामला कछौना थाना क्षेत्र के सांता गांव का है। छिटक्के नामक व्यक्ति ने इस संबंध में प्राथमिकी दर्ज कराई थी। उन्होंने बताया था कि 17 सितंबर 1998 को जब वह अपने घर के बाहर खड़े थे, तभी गांव के गंगाराम अपने पुत्र रामखेलावन और उजागर के साथ वहां आए। आरोपियों ने छिटक्के के साथ गाली-गलौज शुरू कर दी। जब उन्होंने इसका विरोध किया, तो तीनों ने लाठी-डंडों से उनकी पिटाई कर दी। शोर सुनकर छिटक्के की पत्नी माहेश्वरी और पुत्री ज्ञानी भी मौके पर पहुंचीं, जिनके साथ भी आरोपियों ने मारपीट की। अन्य लोगों को आता देख, आरोपी जान से मारने की धमकी देते हुए मौके से फरार हो गए। पुलिस ने इस मामले में मारपीट और धारदार हथियार से वार करने की धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज की थी। आरोपियों ने अपने अधिवक्ता के माध्यम से न्यायालय में हाजिरी दी और तर्क दिया कि यह मामला 27 साल पुराना हो चुका है। उनका कहना था कि प्रत्येक तारीख पर हाजिर रहने के कारण उन्हें पर्याप्त सजा मिल चुकी है और उन्हें परिवीक्षा पर छोड़ दिया जाना चाहिए। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद, अपर सिविल जज साक्षी चौधरी ने आरोपियों को छह महीने तक प्रोबेशन अधिकारी के यहां हाजिरी लगाने की सजा सुनाई।

Leave a Reply