उत्तर प्रदेश में स्मार्ट प्रीपेड मीटर रिचार्ज करने के बावजूद कई घंटे तक बिजली न जुड़ने पर अब राज्य विद्युत नियामक आयोग ने सख्त रुख अपनाया है। उपभोक्ता परिषद की अवमानना याचिका पर आयोग ने सभी बिजली कंपनियों को नोटिस जारी करते हुए 15 दिन में जवाब मांगा है। आयोग के चेयरमैन अरविंद कुमार और सदस्य संजय कुमार सिंह ने साफ कहा कि यह स्टैंडर्ड ऑफ परफॉर्मेंस विनियम 2019 का खुला उल्लंघन है। रिचार्ज के बाद घंटों तक आपूर्ति न बहाल करना उपभोक्ताओं के साथ क्रूर मजाक है। इससे भारी असुविधा और मानसिक तनाव हो रहा है। उपभोक्ता परिषद की याचिका पर आयोग ने मांगा जवाब इसे लेकर 19 मार्च को उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने आयोग में याचिका दायर किया था। आयोग से मांग की थी कि रिचार्ज के 2 घंटे बाद भी बिजली न जुड़े पर 50 रुपए प्रति दिन मुआवजा मिलना चाहिए। नहीं तो दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई हो। आयोग ने सभी कंपनियों (मध्यांचल, पूर्वांचल, दक्षिणांचल, पश्चिमांचल, केस्को, नोएडा पावर, टोरेंट पावर) के प्रबंध निदेशकों को नोटिस जारी कर 15 दिन में जवाब मांगा है। 1 फरवरी से 20 मार्च तक की पूरी डिटेल इन बिंदुओं पर मांगा निजी उपभोक्ताओं को फायदा पहुंचाने पर मंहगा टेंडर उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश वर्मा के मुताबिक प्रदेश में स्मार्ट प्रीपेड मीटर लगाने के लिए भारत सरकार ने 18,885 करोड़ रुपए आवंटित किए थे। लेकिन यूपी में 27,342 करोड़ में टेंडर जारी किया गया। इतना महंगा टेंडर जारी करने के बावजूद रोज नई–नई खामियां आ रही हैं। आम लोगों को पावर कट का सामना करना पड़ रहा है। विभाग पावर कट वाले घरों में तलाश रही चोरी प्रदेश में निगेटिव बैलेंस के कारण स्वतः 5.79 लाख कनेक्शन के पावर कट हुए थे। इसमें से अब तक 2.6 लाख उपभोक्ताओं ने रिचार्ज नहीं कराया है। ऊर्जा विभाग ने छापेमारी अभियान के तहत इन कनेक्शनों में शामिल 8049 परिसरों की पूरे प्रदेश में जांच की। विभाग को 259 परिसरों में बिजली चोरी पकड़ी। सभी के खिलाफ धारा 135 व 138–बी के तहत एफआईआर दर्ज किया गया है।

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