लखनऊ के रवीन्द्रालय चारबाग में चल रहा पुस्तक मेला 22 मार्च को समाप्त हो जाएगा। शुक्रवार को हुई बारिश ने जहां स्टॉलधारकों के लिए मुश्किलें खड़ी कीं, वहीं पुस्तक प्रेमियों के लिए मौसम सुहावना बना दिया। ठंडी हवा और हल्की फुहारों के बावजूद मेले में लोगों की आवाजाही जारी रही। इस बार लखनऊ के पुस्तक मेले में पाठकों का रुझान कला से जुड़ी पुस्तकों की ओर अधिक देखा गया। भारतीय कला प्रकाशन और गुरुग्राम के शुभी प्रकाशन के स्टॉलों पर नृत्य, नाटक, रंगमंच और गायन से संबंधित किताबों की अच्छी मांग रही। इनमें ‘इंडियन क्लासिकल डांसेज़’, ‘हस्त मुद्रा थेरेपी’ और ‘इंडियन माइथोलॉजी थ्रू क्लासिकल डांस’ जैसी पुस्तकें विशेष आकर्षण का केंद्र रहीं। वक्ताओं ने अपने विचार साझा किए स्थानीय साहित्य ने भी पाठकों का ध्यान खींचा। हिंदी वांग्मय निधि के स्टॉल पर लखनऊ की संस्कृति पर आधारित 45 पुस्तिकाओं का एक सेट एक हजार रुपये में उपलब्ध है, जिसे पाठक काफी पसंद कर रहे हैं। स्थानीय लेखकों के स्टॉल पर कमलेश दुबे द्वारा तबले पर लिखी गई पुस्तक भी चर्चा का विषय बनी रही। मेले के मंच पर कई साहित्यिक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। डॉ. डीएस शुक्ला की पुस्तक ‘पत्नी पुराण’ का विमोचन हुआ, जिसमें पूर्व मंत्री सरजीत सिंह डंग, केके अस्थाना और डॉ. सुशील अवस्थी सहित अन्य वक्ताओं ने अपने विचार साझा किए। इसी कड़ी में नम्रता ने कथा वाचन से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध किया। साहित्यकारों ने इन रचनाओं पर विस्तृत चर्चा की लेखिका अलका प्रमोद की पांच पुस्तकों—’अविरल धारा’, ‘बदलता दृश्य’, ‘मन की नदी’, ‘फुलवारी रंग बिरंगी’ और ‘नुक्कड़ नुक्कड़ खेलें खेल’—का भी विमोचन किया गया। इस अवसर पर साहित्यकारों ने इन रचनाओं पर विस्तृत चर्चा की। पूर्व आईपीएस हरीश कुमार की किताबों पर चर्चा के साथ-साथ काव्य प्रस्तुतियां भी हुईं। उनकी रचना ‘इश्क के सात मकाम’ जैसे पाठों ने श्रोताओं को भावुक कर दिया। युवा रचनाकारों ने अपनी कविताओं और कहानियों से मंच पर जीवंत माहौल बना दिया।दिन का समापन साहित्य साधक मंच के काव्य समारोह के साथ हुआ, जहां कवियों ने अपनी रचनाओं से उपस्थित श्रोताओं का मन मोह लिया।

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