देश के ऊर्जा क्षेत्र को तकनीकी और नीतिगत रूप से मजबूत करने के लिए भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) कानपुर और पावर फाउंडेशन ऑफ इंडिया (PFI) के बीच एक बड़ा समझौता हुआ है। शुक्रवार को दोनों संस्थानों ने एक एमओयू पर हस्ताक्षर किए, जिसके तहत आईआईटी कानपुर में एक ‘विशिष्ट चेयर प्रोफेसरशिप’ स्थापित की जाएगी। इसका मुख्य उद्देश्य बिजली क्षेत्र के नियमों और नीतियों में सुधार के लिए उच्च स्तरीय रिसर्च और पढ़ाई को बढ़ावा देना है। इस समझौते पर आईआईटी कानपुर की ओर से प्रो. राजा अंगमुथु और पावर फाउंडेशन की ओर से कार्यकारी निदेशक अंशुमान श्रीवास्तव ने हस्ताक्षर किए। इस मौके पर संस्थान और फाउंडेशन के कई वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे। चेयर प्रोफेसरशिप का सीधा मतलब यह है,कि संस्थान में एक विशेष पद सृजित किया जाएगा, जो पूरी तरह से ऊर्जा क्षेत्र की नीतियों और रिसर्च पर केंद्रित होगा। अक्सर देखा जाता है,कि बिजली क्षेत्र में नई तकनीक तो आ जाती है, लेकिन सही नीतियों और नियमों के अभाव में उसका पूरा लाभ आम लोगों तक नहीं पहुंच पाता है। यह नई पहल अकादमिक जगत, सरकार और बिजली कंपनियों के बीच एक पुल का काम करेगी। इससे भारत के ऊर्जा क्षेत्र के लिए ऐसे समाधान विकसित किए जा सकेंगे जो टिकाऊ और प्रभावी हों। पावर फाउंडेशन के कार्यकारी निदेशक अंशुमान श्रीवास्तव ने कहा कि, आईआईटी कानपुर जैसे प्रतिष्ठित संस्थान के साथ जुड़ना गर्व की बात है। उन्हें भरोसा है कि यह रिसर्च देश में बिजली से जुड़े बड़े फैसलों और नीतियों को बेहतर बनाने में मददगार साबित होगी। वहीं, प्रो. राजा अंगमुथु ने इसे आईआईटी कानपुर के लिए एक मील का पत्थर बताया। उन्होंने कहा कि इससे ऊर्जा क्षेत्र में संस्थान की भागीदारी और अधिक मजबूत होगी। साल 1959 में स्थापित आईआईटी कानपुर पहले से ही विज्ञान और इंजीनियरिंग में देश का नेतृत्व कर रहा है। 1050 एकड़ में फैले इस विशाल कैंपस में अब बिजली क्षेत्र की नई चुनौतियों पर काम होगा। इस समझौते के बाद संस्थान में उद्योग जगत की जरूरतों के हिसाब से शोध किए जाएंगे, जिससे न केवल छात्रों को सीखने का नया मौका मिलेगा, बल्कि देश के सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों को भी तकनीकी और नीतिगत मजबूती मिलेगी।

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