प्रयागराज के मांडा में सात मार्च की शाम स्कूल से घर लौट रहे एलकेजी के छात्र प्रतीक की किडनैपिंग में सनसनीखेज खुलासा हुआ है। इस साजिश का सूत्रधार रिश्ते में मासूम का चाचा लगने वाला उज्जवल शर्मा निकला। उसने गाजीपुर के तीन समेत चार दोस्तों संग मिलकर यह घटना अंजाम दी। मकसद 20 लाख की फिरौती मांगना था लेकिन वह इसमें नाकाम रहे। पुलिस ने मास्टरमाइंड समेत चार को गिरफ्तार कर लिया है, जबकि एक की तलाश की जा रही है। वाराणसी से बरामद हुआ था
एडिशनल सीपी लॉ एंड ऑर्डर के नेतृत्व में इस पूरे ऑपरेशन को लीड डीसीपी यमुनानगर विवेक चंद्र यादव कर रहे थे। मामले में अलग-अलग छह टीमें लगाई गई थीं। इन टीमों ने बच्चे को दूसरे दिन ही वाराणसी के एक गेस्ट हाउस से सकुशल बरामद किया था, जहां किडनैपर उसे छोड़कर भाग निकले थे।
बच्चे से पूछताछ में पता चला कि वह नागू और बनारसी मामा के साथ था, जिस पर बच्चे के ननिहाल पक्ष के दो युवकों को उठाया गया। गहन पूछताछ के बाद भी उनका कोई रोल इस घटना में सामने नहीं आया। इसके बाद अन्य बिंदुओं पर पड़ताल शुरू की गई। मोबाइल नंबर से जुड़ी कड़ी से कड़ी
पुलिस सूत्रों के मुताबिक, जिस वक्त बच्चे का अपहरण हुआ, उसके इर्द-गिर्द एक मोबाइल नंबर उसके घर के आसपास एक्टिव पाया गया। डिटेल निकलवाने पर पता चला कि यह राजकुमार पांडेय का है जो पड़ोस के गांव नीबी भटान का रहने वाला है। पुलिस ने उसे उठाया और पूछताछ की तो वह घटना की जानकारी से ही इंकार करता रहा।
हालांकि जब उसकी सीडीआर निकाली गई तो इसमें बच्चे के पिता के सगे चाचा के बेटे उज्जवल शर्मा का नंबर मिला। उज्जवल के बारे में पहले ही मैनुअल इनपुट था कि उसकी आम शोहरत ठीक नहीं है। जब उज्जवल से पूछताछ की गई और उसकी सीडीआर निकाली गई तो गाजीपुर के आशुतोष उर्फ हिमांशु, प्रशांत राय ओर नितिन का नाम सामने आया। आशुतोष उसका मौसेरा भाई भी है।
पूछताछ में जो तथ्य सामने आए, उसके आधार पर आशुतोष, नितिन को भी उठाया गया। चारों को आमने-सामने बैठाकर पूछताछ की गई तो पता चला कि यह साजिश 20 लाख रुपये की फिरौती मांगने के लिए उज्जवल ने रची। उसने अपने मौसेरे भाई के साथ मिलकर प्लान बनाया और इसके बाद अन्य तीन लोगों को भी शामिल कर लिया। कैसे दिया वारदात को अंजाम
उज्जवल ने बताया, तय प्लानिंग के मुताबिक जिस अल्टो में किडनैपिंग की गई, उसे राजकुमार चला रहा था जबकि आशुतोष ने बच्चे को उठाकर कार में खींचा था। दोनों बच्चे को लेकर कार से टेला घाट पीपा पुल से होते हुए भदोही और फिर चंदौली बॉर्डर पर पहुंचे। यहां प्रशांत अपनी होंडा अमेज कार लेकर नितिन के साथ आया और फिर आशुतोष भी बच्चे को साथ लेकर उनके साथ हो गया। जबकि अल्टो लेकर राजकुमार मांडा के महेवाघाट गया और सुनसान जगह पर कार छोड़कर वापस चला आया। इसलिए बदलना पड़ा प्लान
इसके बाद आशुतोष व अन्य दोनों बच्चे को लेकर वाराणसी में अपने ससुर के पुराने बंद पड़े मकान पर पहुंचा और बच्चे को वहीं पर रखे रहा। उज्जवल ने पूछताछ में बताया कि वह गांव में ही मौजूद रहकर पुलिस और घरवालों की सारी एक्टिविटी पर नजर बनाए रहा। रात में ही उसने देखा कि मौके पर पुलिस कमिश्नर समेत तमाम आलाधिकारी पहुंच गए हैं और पुलिस सरगर्मी से किडनैपरों की तलाश कर रही है तो उसने प्लान बदल दिया। इसके बाद उसके कहने पर ही आशुतोष, प्रशांत व नितिन बच्चे को गेस्ट हाउस के पास छोड़कर भाग निकले। उसने ही तीनों से कहा था कि वह बच्चे को डरा धमकाकर यह रटा दें कि वह नागू व बनारसी मामा के साथ था, जिस पर बच्चे ने यही जवाब दिया। डीसीपी यमुनानगर विवेक चंद्र यादव ने बताया कि साजिशकर्ता समेत चार आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया है। प्रशांत की तलाश की जा रही है। चारों को जेल भेज दिया गया है।

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