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विधायक दिनेश खटीक बोले- जनता हमेशा भाजपा के साथ रही:विकास के दम पर फिर जीतेंगे; हमने खोई पहचान दिलाई, कृष्ण-पांडव मंदिर बनवाएंगे

मेरठ की हस्तिनापुर विधानसभा सीट से विधायक और उत्तर प्रदेश सरकार में राज्यमंत्री दिनेश खटीक ने कहा- केंद्र और प्रदेश सरकार ने ऐतिहासिक नगरी हस्तिनापुर के विकास को प्राथमिकता दी है। क्षेत्र में सड़क, पर्यटन, शिक्षा और बाढ़ नियंत्रण जैसे कई बड़े काम हुए हैं। हस्तिनापुर की जनता हमेशा भाजपा के साथ रही है। आगे भी वही भरोसा जिताएगी। विकास के दम पर फिर जीतेंगे। हस्तिनापुर को हमने उसकी खोई पहचान दिलाई। दोबारा मौका मिला तो कृष्ण-पांडव मंदिर बनाएंगे। साथ ही हस्तिनापुर को रेलवे लाइन से जोड़ना भी मेरी प्राथमिकता है। दैनिक भास्कर से बातचीत में राज्यमंत्री दिनेश खटीक ने अपने कार्यकाल, भविष्य की योजनाओं और 2027 के चुनाव को लेकर खुलकर बात की। पढ़िए सवाल-जवाब… सवाल- 4 सालों के अपने कार्यकाल में कौन से बड़े काम किए हैं?
जवाब- आजादी के बाद जवाहरलाल नेहरू ने एक ही दिन चंडीगढ़ और हस्तिनापुर की नींव रखी थी। लेकिन दुर्भाग्य से पूर्व की सरकारों—चाहे सपा, बसपा या कांग्रेस—ने हस्तिनापुर के विकास पर ध्यान नहीं दिया। जब से प्रदेश में भाजपा की सरकार बनी और योगी आदित्यनाथ मुख्यमंत्री बने, हर बजट में हस्तिनापुर के विकास के लिए कुछ न कुछ दिया गया। किसानों के लिए गंगा किनारे करीब 26 किमी लंबा बांध बनाया गया है। जहां हर साल बाढ़ आती थी, उस क्षेत्र को बाढ़ग्रस्त घोषित कर वहां 226 करोड़ रुपए की परियोजनाएं दी गईं। अब बांध बनने के बाद किसान राहत महसूस कर रहे हैं। लड़कियों के लिए डिग्री कॉलेज बनाया गया है। भगवान श्रीकृष्ण के उपदेश का चित्रण करते हुए भव्य प्रवेश द्वार बनाया गया है और पांचों पांडवों के नाम पर भी गेट बनाए गए हैं। सबसे बड़ा काम चांदपुर और बिजनौर को जोड़ने वाला पुल है, जिससे अब हस्तिनापुर से चांदपुर एक घंटे में पहुंचा जा सकता है। दिल्ली से बिजनौर और चांदपुर की कनेक्टिविटी भी बेहतर हुई है। मखदूमपुर से नया गांव तक करीब 24 किमी सड़क का चौड़ीकरण कराया गया है। शिक्षा, सड़क, स्वास्थ्य और पर्यटन हर क्षेत्र में काम हुआ है। किसानों की सुविधा के लिए रजवाहों और नहरों पर 73 पुल भी बनवाए गए हैं। सवाल- अगर दोबारा अवसर मिला तो कौन से काम कराएंगे?
जवाब- हस्तिनापुर का विकास कभी नहीं रुकेगा। अभी कई परियोजनाओं पर काम होना बाकी है। यह देश के प्रमुख पौराणिक स्थलों में से एक है, इसलिए यहां पर्यटन और बुनियादी ढांचे को और मजबूत करना है। बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों को पूरी तरह सुरक्षित करना है, बांध को आगे तक बढ़ाना है और नहरों की पटरियों का चौड़ीकरण कराना है। साथ ही मवाना के चारों ओर आउटर रिंग रोड बनवाने की योजना भी है। सवाल- कोई ड्रीम प्रोजेक्ट जो अभी बाकी है?
जवाब- हस्तिनापुर के चारों ओर सड़कों का चौड़ीकरण और रिंग रोड का काम अभी बाकी है। जिस तरह अयोध्या में श्रीराम मंदिर बना, काशी में बाबा विश्वनाथ मंदिर का भव्य स्वरूप विकसित हुआ और मथुरा में भी काम हो रहा है, उसी तरह हस्तिनापुर में भगवान श्रीकृष्ण और पांडवों का भव्य मंदिर बनाएंगे। इसके साथ एक बड़ा पुस्तकालय और संग्रहालय बनवाने की भी योजना है, जिसमें पौराणिक और ऐतिहासिक विरासत से जुड़ी सामग्री होगी। वहां शहीदों की गाथाएं भी लोगों को सुनने को मिलेंगी। साथ ही हस्तिनापुर को रेलवे लाइन से जोड़ना भी मेरी प्राथमिकता है। सवाल- 2027 के चुनाव में क्या आपको टिकट मिलेगा?
जवाब- मैं बचपन से स्वयंसेवक रहा हूं। पार्टी ने मुझे दो बार टिकट दिया और मंत्री बनने का अवसर भी दिया। एक कार्यकर्ता के रूप में जहां पार्टी मुझे जिम्मेदारी देगी, वहीं से चुनाव लड़ूंगा। टिकट किसे देना है, यह फैसला पार्टी नेतृत्व करता है। मैं जीवन भर हस्तिनापुर की सेवा करता रहूंगा। सवाल- हाल ही में आपका एक वीडियो वायरल हुआ जिसमें आपने हस्तिनापुर की श्रापित भूमि से चुनाव न लड़ने की बात कही थी?
जवाब- वह वीडियो एक स्कूल के वार्षिक समारोह का है, जहां बच्चों ने ‘युगांतर’ नाम का नाटक प्रस्तुत किया था। उसमें द्रौपदी चीरहरण का दृश्य था। बच्चों का अभिनय इतना भावुक था कि सबकी आंखों में आंसू आ गए। उसी संदर्भ में मैंने द्रौपदी के श्राप की बात कही थी। लेकिन कुछ लोगों ने उसे गलत तरीके से प्रचारित कर दिया। मैं हमेशा हस्तिनापुर की सेवा करता रहूंगा, चाहे किसी भी पद पर रहूं। सवाल- नगीना सांसद और आजाद समाज पार्टी के प्रमुख चंद्रशेखर आजाद के हस्तिनापुर से चुनाव लड़ने की चर्चा है, इसे कैसे देखते हैं?
जवाब- चुनाव लड़ना हर किसी का अधिकार है। कोई भी व्यक्ति लोकतांत्रिक प्रक्रिया में भाग ले सकता है। जीत और हार का फैसला जनता करती है। हस्तिनापुर की जनता ने हमेशा भाजपा को अपना समर्थन दिया है और आगे भी भाजपा को ही अपना प्यार और वोट देगी। बाकी जो भी नेता यहां से चुनाव लड़ना चाहें, लड़ सकते हैं। जीत भाजपा की ही होगी।

Source: Dainik Bhaskar via DNI News (Prayagraj)

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