आगरा के सिकंदरा थाने में पुलिस हिरासत में राजू गुप्ता की मौत के सनसनीखेज मामले में अपर जिला जज 17 नितिन कुमार ठाकुर ने फैसला सुनाया। गैर इरादतन हत्या, मारपीट के आरोपित दरोगा अनुज सिरोही और राजू गुप्ता के पड़ोसी अंशुल प्रताप सिंह को दोषी पाया गया। कोर्ट ने दरोगा अनुज सिरोही को 10 साल और अंशुल प्रताप सिंह को 7 साल की सजा सुनाई गई है। दोनों पर 10-10 हजार का अर्थदंड भी लगाया है। एक आरोपित विवेक कुमार सिंह को साक्ष्य के अभाव में बरी किया गया। 2018 की है घटना
घटना 22 नवंबर 2018 की है। राजू गुप्ता को दरोगा अनुज सिरोही ने इतना टॉर्चर किया था कि राजू गुप्ता की मौत हो गई थी। इस मामले में 7 साल बाद फैसला आया है।
गैलाना रोड, नरेंद्र एन्क्लेव निवासी रेनू गुप्ता के बेटे 30 वर्षीय राजू गुप्ता की 22 नवंबर 2018 को पुलिस हिरासत में मौत हुई थी। कालोनी में रहने वाले अंशुल प्रताप सिंह के घर से जेवर चोरी हो गए थे। उन्हें राजू गुप्ता पर शक था। बिना किसी मुकदमे के पुलिस राजू गुप्ता को 21 नवंबर को पकड़कर थाने ले गई थी। मां रेनू गुप्ता को भी अवैध हिरासत में रखा था। मां की मौजूदगी में कपड़े उतारकर बेटे को बेरहमी से पीटा गया था। 22 नवंबर को राजू की मौत हो गई थी।
कोर्ट ने कहा-दोषपूर्ण हुई विवेचना
कोर्ट ने केस की विवेचना पर सवाल उठाते हुए टिप्पणी भी की। कोर्ट ने माना कि पुलिस अधिकारियों ने विवेचना में लापरवाही बरती। साक्ष्यों के साथ न्याय नहीं किया। कोर्ट ने यूपी के गृह सचिव और पुलिस कमिश्नर को आदेश दिया है कि तत्कालीन निरीक्षक राजेश कुमार पांडेय और तत्कालीन क्षेत्राधिकारी चमन सिंह चापड़ा के खिलाफ सेवा नियमों के तहत विभागीय कार्रवई की जाए।

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