चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय में कुलपति प्रो. संगीता शुक्ला की अध्यक्षता में कार्य परिषद की बैठक कमेटी हॉल में संपन्न हुई, जिसमें शैक्षणिक और प्रशासनिक मुद्दों पर चर्चा के बाद कई अहम निर्णय लिए गए। विश्वविद्यालय में शोध और सांस्कृतिक शिक्षा को बढ़ावा देने पर विशेष जोर रहा। बैठक में सबसे पहले 8 जनवरी को हुई पिछली कार्य परिषद बैठक के कार्यवृत्त की पुष्टि की गई, वहीं 18 मार्च को आयोजित विद्वत परिषद के निर्णयों को भी मंजूरी प्रदान की गई। इसके साथ ही 59 शोधार्थियों को पीएचडी उपाधि देने के प्रस्ताव पर मुहर लगाई गई, जिसे विश्वविद्यालय में शोध गतिविधियों को नई गति देने वाला महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। कार्य परिषद ने पद्मश्री लोक गायिका मालिनी अवस्थी और शैलेंद्र जायसवाल को एक वर्ष के लिए ‘प्रोफेसर ऑफ प्रैक्टिस’ नियुक्त करने की स्वीकृति दी। यह निर्णय विश्वविद्यालय में लोक कला, लोक संगीत और व्यावहारिक शिक्षा को पाठ्यक्रम से जोड़ने की दिशा में अहम पहल माना जा रहा है। विश्वविद्यालय ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुरूप सत्र 2026-27 से चार वर्षीय इंटीग्रेटेड शिक्षक शिक्षा कार्यक्रम (बीए-बीएड व बीएससी-बीएड) शुरू करने की घोषणा की है। इन कोर्सों के संचालन के लिए राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद से मान्यता भी प्राप्त हो चुकी है। विश्वविद्यालय प्रशासन के अनुसार, इन पाठ्यक्रमों में प्रवेश राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी द्वारा आयोजित राष्ट्रीय स्तर की प्रवेश परीक्षा के माध्यम से होगा। 2026 में 12वीं की परीक्षा देने वाले या उत्तीर्ण अभ्यर्थी पात्रता के अनुसार आवेदन कर सकेंगे। इस इंटीग्रेटेड कोर्स में विषय ज्ञान के साथ शिक्षण कौशल, स्कूल इंटर्नशिप, शैक्षिक तकनीक और शोध आधारित प्रशिक्षण दिया जाएगा। चार साल की पढ़ाई पूरी करने पर विद्यार्थियों को स्नातक के साथ बीएड की डिग्री प्रदान की जाएगी। प्रवेश प्रक्रिया यूजीसी और राज्य सरकार के दिशा-निर्देशों के तहत, मेरिट और आरक्षण नीति के आधार पर पूरी होगी। बैठक में कुलसचिव, वित्त अधिकारी, परीक्षा नियंत्रक सहित कई वरिष्ठ अधिकारी और प्रोफेसर मौजूद रहे।

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