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कानपुर के न्यूरो मरीजों को बड़ी राहत:CSJMU मे 25 करोड़ से बनेगा 250 बेड का अस्पताल, पार्किंग की खाली जमीन पर लाइफ-सेविंग बिल्डिंग बनेगी

छत्रपति शाहूजी महाराज विश्वविद्यालय (CSJMU) अब केवल शिक्षा ही नहीं, बल्कि स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में भी एक बड़ी इबारत लिखने जा रहा है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने कैंपस के भीतर 250 बेड के एक अत्याधुनिक अस्पताल के निर्माण की तैयारी पूरी कर ली है। इसके लिए मुख्य गेट के पास स्थित पार्किंग और उच्च शिक्षा विभाग के कार्यालय के बीच की खाली भूमि को चिह्नित किया गया है। अस्पताल की इमारत का डिजाइन और डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार की जा रही है, जिसका निर्माण विश्वविद्यालय प्रबंधन स्वयं अपने स्तर पर करवाएगा। 25 करोड़ का बजट मंजूर, विवि खुद बनाएगा इमारत इस परियोजना को धरातल पर उतारने के लिए विश्वविद्यालय की वित्त समिति ने 25 करोड़ रुपये के शुरुआती बजट को मंजूरी दे दी है। भवन निर्माण पूरा होने के बाद इसके संचालन की प्रक्रिया पीपीपी मोड पर तय की जाएगी। विश्वविद्यालय का यह कदम न केवल चिकित्सा शिक्षा को बढ़ावा देगा, बल्कि छात्रों के व्यावहारिक प्रशिक्षण के लिए भी एक महत्वपूर्ण केंद्र साबित होगा। यह अस्पताल आधुनिक सुविधाओं से लैस होगा और इसमें आने वाले समय में स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार किया जाएगा। न्यूरो रीहैबिलिटेशन सेंटर के रूप में होगी शुरुआत कुलपति प्रो. विनय कुमार पाठक ने बताया कि, प्राथमिक चरण में इस अस्पताल को ‘न्यूरो रीहैबिलिटेशन सेंटर’ के रूप में संचालित करने की योजना है। इससे न्यूरोलॉजिकल समस्याओं और नसों से जुड़ी गंभीर बीमारियों से जूझ रहे मरीजों को विशेष उपचार और पुनर्वास सेवाएं मिल सकेंगी। अस्पताल की एक बड़ी विशेषता यह होगी कि यहाँ आम जनता को बहुत ही किफायती दरों पर फिजियोथेरेपी और अन्य चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी, जिससे आसपास के क्षेत्रों के नागरिकों को सीधा लाभ होगा। मेडिकल कोर्सेज का बदलेगा स्वरूप, नर्सिंग की राह होगी आसान: अस्पताल के निर्माण के साथ ही विश्वविद्यालय में चिकित्सा क्षेत्र से जुड़े छह नए पाठ्यक्रम शुरू किए जाएंगे। इनमें मेडिकल लेबोरेटरी साइंस, फिजियोथेरेपी, ऑप्टोमेट्री और मेडिकल रेडियोलॉजी इमेजिंग टेक्नोलॉजी जैसे विषयों में स्नातक और परास्नातक स्तर तक की पढ़ाई होगी। वहीं, एनेस्थीसिया एंड ऑपरेशन थिएटर टेक्नोलॉजी का पाठ्यक्रम फिलहाल स्नातक स्तर पर संचालित किया जाएगा। इस अस्पताल के बनने से बी.एससी नर्सिंग जैसे कोर्स शुरू करने का रास्ता भी साफ हो गया है, क्योंकि ऐसे पाठ्यक्रमों की मान्यता के लिए न्यूनतम 100 बेड के अस्पताल की अनिवार्यता होती है।

Source: Dainik Bhaskar via DNI News (Prayagraj)

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