मिर्जापुर। चैत्र नवरात्र के दूसरे दिन विंध्याचल धाम में आदिशक्ति माँ विंध्यवासिनी के ब्रह्मचारिणी स्वरूप की विशेष पूजा-अर्चना की जा रही है। इस अवसर पर देश के विभिन्न हिस्सों से आए श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा है, जो माँ के दर्शन के लिए लंबी कतारों में खड़े हैं। विद्वान आचार्य पं. राजन मिश्र ने बताया कि अनादिकाल से आस्था के केंद्र रहे विंध्य क्षेत्र में विंध्य पर्वत और गंगा नदी के तट पर विराजमान माँ विंध्यवासिनी का आज ब्रह्मचारिणी रूप में पूजन हो रहा है। इस धाम में माँ को बिंदुवासिनी के नाम से भी जाना जाता है। नवरात्र के नौ दिनों में माँ के विभिन्न स्वरूपों की पूजा का विधान है, जिसमें ब्रह्मचारिणी की आराधना दूसरे दिन विशेष फलदायी मानी जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त करने के लिए माँ ने कठोर तपस्या की थी। इसी कारण उन्हें ब्रह्मचारिणी या तपस्याचारिणी कहा जाता है। नवरात्र के दूसरे दिन विंध्यवासिनी धाम में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ देखी जा रही है। देश के कोने-कोने से आए भक्त माँ के दर्शन के लिए घंटों कतारों में खड़े होकर अपनी बारी का इंतजार कर रहे हैं। कई श्रद्धालु पूरे नौ दिनों तक विंध्याचल में ही रहकर माँ की आराधना करते हैं। श्रद्धालुओं का मानना है कि सच्चे मन से की गई पूजा से माँ प्रसन्न होकर सभी मनोकामनाएँ पूर्ण करती हैं। मेला क्षेत्र में की गई व्यवस्थाओं पर भी श्रद्धालुओं ने संतोष व्यक्त किया। श्रद्धालु महेश उपाध्याय ने बताया कि माँ के दर्शन से मन को शांति मिलती है और हर वर्ष नवरात्र में यहाँ आने का अनुभव विशेष होता है। नवरात्र के नौ दिनों में माँ के विभिन्न स्वरूपों की पूजा से भक्त कष्टों से मुक्ति पाते हैं। माँ ब्रह्मचारिणी के दर्शन से नई ऊर्जा, सकारात्मकता और आत्मबल का संचार होता है। विंध्य धाम में श्रद्धालु “जय माँ विंध्यवासिनी” के जयकारों के साथ अपनी आस्था प्रकट कर रहे हैं।

Leave a Reply