पटना की धड़कन कहे जाने वाली बेली रोड पर शनिवार सुबह आम दिनों से अलग थी। ट्रैफिक के शोर पर केसरिया झंडे और सियासी नारे हावी थे। बीजेपी कार्यकर्ताओं का हुजूम उस 3 एकड़ की बंजर जमीन के बाहर जुटा था, जिस पर कभी बिहार का सबसे बड़ा मॉल बन रहा था। यह 12+2 मंजिला इमारत का एक ख्वाब था- एक ऐसा सपना, जिसमें फाइव स्टार होटल, मल्टीप्लेक्स, शॉपिंग कॉम्प्लेक्स और 1 हजार दुकानें होनी थीं। लेकिन आज, यह जमीन ED द्वारा “जब्त” एक साइलेंट विटनेस है, जो 19 साल पुराने भ्रष्टाचार के आरोपों की कहानी कह रही है। यह बिहार के चुनावी माहौल में उस ‘जिन’ को बोतल से बाहर निकालने की कोशिश है, जिसके निशाने पर सीधे तौर पर तेजस्वी यादव और RJD सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव हैं। गड्ढा, जंग और एक गुमशुदा बोर्ड नारेबाजी के शोर से चंद कदम दूर, आरोपों की हकीकत एक 30 फीट गहरे गड्ढे में डूबी है। यह विशाल गड्ढा मॉल के बेसमेंट के लिए खोदा गया था, जो अब बरसात के पानी से लबालब तालाब बन चुका है। पानी का रंग गहरा हरा है, जो इसके ठहरे होने की गवाही दे रहा है। निर्माण कार्य में लगी भीमकाय क्रेन और दूसरी भारी मशीनें इस गंदे पानी में आधी डूबी हैं। उन पर जंग की मोटी परत चढ़ चुकी है। सड़क किनारे, जहां कभी मॉल का भव्य गेट बनना था, आज एक शख्स रजाई भरने की दुकान लगाए बैठा है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) का वह बोर्ड, जिस पर इस जमीन को कुर्क करने की सूचना लिखी है, वह भी एक कोने में झाड़ियों के बीच लगभग गुम हो गया है। इस कीमती जमीन के चारों ओर ऊंची-ऊंची इमारतें तन गई हैं, लेकिन यह प्लॉट जंगली घास और झाड़ियों से पटा है। विडंबना देखिए, इसके ठीक पूरब में रूपसपुर थाना है, जिसने जमीन के एक हिस्से को जब्त की गई कबाड़ गाड़ियों का डंपिंग यार्ड बना दिया है। “यह रास्ता तिहाड़ जेल जाता है”- बीजेपी प्रवक्ता शनिवार को इसी बंजर जमीन के बाहर माइक पर बीजेपी प्रवक्ता अजय आलोक गरज रहे थे। उन्होंने कहा कि, ‘इस जमीन का रास्ता सड़क पर नहीं, तिहाड़ जेल की ओर जाता है। यही जमीन है जिसे जीरो रुपए में खरीदा गया।’ उनके साथ खड़े पार्टी के दूसरे प्रवक्ता नीरज कुमार ने कहा, ‘यह जमीन IRCTC घोटाले की निशानी है। इसका मार्केट वैल्यू 300 करोड़ रुपए है। चोर का बेटा चोर होता है। भ्रष्टाचार की परछाई को सटने नहीं देंगे।’ सवाल उठता है कि 19 साल पुराने इस मामले को ऐन चुनाव के वक्त क्यों उछाला गया? इसकी वजह बना 23 अक्टूबर को दिया गया तेजस्वी यादव का वह बयान, जिसमें उन्होंने (CM चेहरे के तौर पर) कहा था, ‘तेजस्वी यादव की परछाई भी गलत करेगी तो उसको भी सजा दिलाएंगे। मेरा यही संकल्प है।’ बीजेपी ने तेजस्वी के इसी ‘संकल्प’ को पकड़ लिया और जवाब में भ्रष्टाचार के सबसे बड़े प्रतीक, इस मॉल की जमीन पर प्रदर्शन कर दिया। अजय आलोक ने साफ कहा कि, ‘यह एक सोची-समझी रणनीति है। लालू की सभी जब्त जमीन पर प्रोटेस्ट किया जाएगा। बिहार की जनता के दिमाग में भ्रष्टाचार की इस जमीन को जिंदा रखने के लिए पार्टी के नेता हर जब्त जमीन पर जाएंगे।’ क्या है यह पूरा मामला? यह मामला पहली बार 2017 में भड़का, जब (स्वर्गीय) सुशील कुमार मोदी ने आरोप लगाया कि निर्माणाधीन मॉल के बेसमेंट से निकली 80 लाख रुपए की मिट्टी, बिना टेंडर के पटना जू को बेची गई। हालांकि, ‘मिट्टी घोटाले’ की जांच में कुछ खास नहीं निकला। ‘मिट्टी’ तो बस एक परत थी। असली आरोप 2006 का है, जब लालू यादव केंद्र में रेल मंत्री थे। आरोप के मुख्य बिंदु : होटल लीज: लालू यादव पर आरोप है कि उन्होंने IRCTC के रांची और पुरी के 2 होटलों को कोचर बंधुओं (विजय और विनय कोचर) की निजी कंपनी सुजाता होटल्स को लीज पर दिया। ‘एवज’ में जमीन: इसके बदले में, कोचर बंधुओं ने पटना की यह कीमती 3 एकड़ जमीन RJD सांसद प्रेमचंद गुप्ता की पत्नी सरला गुप्ता की कंपनी ‘डिलाइट मार्केटिंग’ को दी। LARA को ट्रांसफर: बाद में, यह कंपनी (डिलाइट मार्केटिंग), जमीन सहित, ‘लारा प्रोजेक्ट्स एलएलपी’ (लालू-राबड़ी) के नाम कर दी गई, जिसमें तेजस्वी और तेज प्रताप भी पार्टनर हैं। 64 लाख रुपए लगाई गई जमीन की कीमत CBI के अनुसार, यह जमीन 2005 में केवल 1.47 करोड़ रुपए में बेची गई, जबकि उस समय की सर्किल रेट 1.93 करोड़ थी। 2014 तक इस जमीन का बाजार मूल्य 94 करोड़ रुपए हो चुका था। आरोप है कि लालू परिवार ने इसके शेयर मात्र 64 लाख रुपए में हासिल कर लिए। यानी 93 करोड़ से ज्यादा का फायदा। इसी मामले में CBI ने 5 जुलाई 2017 को केस दर्ज किया। 28 मई 2018 को ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग के इस मामले में 44.75 करोड़ रुपए (तत्कालीन मूल्य) की इस जमीन को कुर्क कर लिया। 12 अक्टूबर 2025 को दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने लालू यादव, राबड़ी देवी और तेजस्वी यादव के खिलाफ भ्रष्टाचार, आपराधिक साजिश और धोखाधड़ी के आरोप तय किए। कोर्ट ने टिप्पणी की कि लालू इस साजिश के “फाउंटेनहेड” (मूल स्रोत) थे, जबकि राबड़ी और तेजस्वी इसमें भागीदार थे। वह सड़क, जो पटना का ‘इतिहास’ है यह सब उस बेली रोड पर हो रहा है, जिसे अब नेहरू पथ कहा जाता है। यह पटना और दानापुर को जोड़ने वाली शहर की सबसे VIP सड़क है। इसी सड़क पर पटना हाईकोर्ट, सचिवालय, चिड़ियाघर, एयरपोर्ट और बिहार म्यूजियम हैं। आज, इसी VIP सड़क पर खड़ा वह प्लॉट—जहां कभी सपनों का महल बनना था—भ्रष्टाचार का एक खुला स्मारक बन गया है। एक तरफ 30 फीट गहरा ठहरा हुआ हरा पानी है, दूसरी तरफ 19 साल पुराने आरोपों का उबलता हुआ सियासी शोर। बीच में खड़ा है चुनाव, जहां यह जमीन फिर से सियासत का सबसे गर्म मैदान बन गई है।
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