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सैफई मानसिक रोग विभाग में महिला से दुष्कर्म:आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय का सफाई कर्मी गिरफ्तार, विभागाध्यक्ष हटाए गए; जांच समितियां गठित

इटावा में उत्तर प्रदेश आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय, सैफई में मानसिक रोग विभाग में 24 जून 2025 से भर्ती एक बेसहारा महिला मरीज के साथ यौन शोषण का गंभीर मामला सामने आया है। महिला के पांच महीने की गर्भवती होने के बाद यह घटना उजागर हुई। मामले में आउटसोर्स सफाई कर्मी को आरोपी बनाया गया है, जिसे पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। एफआईआर दर्ज हो चुकी है, विभागाध्यक्ष डॉ. अरुण कुमार मिश्रा को हटाया गया है और जांच के लिए कमेटियां गठित कर दी गई हैं। इस पूरे मामले ने अस्पताल की सुरक्षा व्यवस्था और निगरानी प्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। प्रेस नोट से हुआ खुलासा विश्वविद्यालय के प्रवक्ता शिवम झा द्वारा जारी प्रेस नोट के अनुसार, मनोचिकित्सा विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. अरुण कुमार मिश्रा ने 18 मार्च 2026 को पत्र भेजकर बताया कि उनके वार्ड में भर्ती एक मानसिक रोगी महिला के साथ यौन शोषण हुआ। महिला बेसहारा बताई जा रही है और अस्पताल में उसका इलाज चल रहा था। आरोप है कि आउटसोर्स के तहत तैनात सफाई कर्मचारी रविंद्र ने इस वारदात को अंजाम दिया, जिसके कारण महिला गर्भवती हो गई। एफआईआर दर्ज, आरोपी गिरफ्तार घटना की सूचना मिलने के बाद 18 मार्च को थाना सैफई में तहरीर दी गई। पुलिस ने तत्काल कार्रवाई करते हुए आरोपी को हिरासत में लिया और पूछताछ शुरू की। बाद में उसे गिरफ्तार कर लिया गया। 19 मार्च 2026 को एफआईआर संख्या 0032 भारतीय दंड संहिता की धारा 64(2) के तहत दर्ज की गई। क्षेत्राधिकारी रामगोपाल शर्मा के अनुसार जांच के दौरान आरोपी की संलिप्तता सामने आई है और आगे की कार्रवाई जारी है। सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल इस घटना ने अस्पताल की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सवाल यह है कि महिला का नियमित मेडिकल परीक्षण होता था, फिर गर्भावस्था की जानकारी पहले क्यों नहीं मिली। इसके अलावा, महिला मरीज के वार्ड में पर्याप्त सुरक्षा गार्ड क्यों नहीं थे। इस लापरवाही को लेकर अब जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में आ गई है। अस्पताल प्रशासन की सख्त कार्रवाई मामला सामने आते ही विश्वविद्यालय प्रशासन ने तुरंत कदम उठाए। संबंधित विभाग के सभी आंतरिक कर्मचारियों का तत्काल प्रभाव से स्थानांतरण कर दिया गया। साथ ही अस्पताल परिसर के सीसीटीवी फुटेज को सुरक्षित रखने के निर्देश दिए गए। विभागाध्यक्ष से पूरे मामले की विस्तृत रिपोर्ट भी मांगी गई, ताकि हर स्तर पर हुई चूक की जांच हो सके।
जांच समितियों का गठन और कानूनी प्रक्रिया पीड़िता को न्याय दिलाने के लिए विश्वविद्यालय प्रशासन ने अधिवक्ता से कानूनी सलाह ली और उसी आधार पर 19 मार्च 2026 को तीन सदस्यीय जांच समिति का गठन किया गया। इस समिति को 48 घंटे के भीतर अपनी रिपोर्ट देने के निर्देश दिए गए। समिति विभाग के कर्मचारियों की भूमिका, सुरक्षा व्यवस्था और संभावित लापरवाही की जांच करेगी। पीड़िता के इलाज के लिए विशेष मेडिकल टीम महिला मरीज की स्थिति को देखते हुए मुख्य चिकित्सा अधीक्षक ने ऑब्स एंड गायनी विभाग की अध्यक्षता में एक विशेष मेडिकल टीम गठित की है। यह टीम महिला की गर्भावस्था और स्वास्थ्य से जुड़ी सभी जरूरी जांच और उपचार सुनिश्चित करेगी, ताकि उसे किसी प्रकार की दिक्कत न हो और बेहतर इलाज मिल सके। उच्च स्तर पर भेजी गई जानकारी इस पूरे मामले की जानकारी 19 मार्च 2026 को जिलाधिकारी इटावा को भेज दी गई। साथ ही आंतरिक शिकायत समिति से भी रिपोर्ट मांगी गई। प्रशासनिक स्तर पर इस मामले को गंभीरता से लिया जा रहा है और लगातार निगरानी की जा रही है। विभागाध्यक्ष हटाए गए, जिम्मेदारी तय होगी घटना के बाद मनोचिकित्सा विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. अरुण कुमार मिश्रा को तत्काल प्रभाव से कार्यमुक्त कर दिया गया। उनके स्थान पर चिकित्सा संकायाध्यक्ष को अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया। इससे स्पष्ट है कि प्रशासन अब इस मामले में जिम्मेदारी तय करने के मूड में है और किसी भी तरह की लापरवाही को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

Source: Dainik Bhaskar via DNI News (Prayagraj)

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