कानपुर में 9 राज्यों के 14 यूनिवर्सिटी की फर्जी डिग्री और मार्कशीट बनाने के मामले में SIT जांच में बड़ा खुलासा हुआ है। जांच में 3 यूनिवर्सिटी की कुल 287 डिग्री और मार्कशीट फर्जी पाई गई हैं। इनमें सबसे ज्यादा 284 डिग्री और मार्कशीट मणिपुर की एशियन यूनिवर्सिटी की हैं। इसके अलावा सिक्किम प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी की 3 में से 2 डिग्री और ईटानगर की हिमालयन यूनिवर्सिटी की 1 डिग्री फर्जी मिली है। 371 मार्कशीट, डिग्री व माइग्रेशन सर्टिफिकेट प्रबंधन को सौंपे इसके साथ ही SIT ने सीएसजेएमयू की 371 मार्कशीट, डिग्री व माइग्रेशन सर्टिफिकेट प्रबंधन को सौंप दिए हैं। SIT की अगुवाई कर रहे एडीसीपी साउथ योगेश कुमार ने बताया कि सीएसजेएमयू प्रबंधन ने 2 से 3 दिन में दस्तावेजों के सत्यापन की जांच करने की बात कही है। वहीं, फर्जी डिग्री गिरोह से जुड़े फरार सदस्यों की तलाश में विभिन्न प्रदेशों में छापेमारी चल रही है। एडीसीपी साउथ ने बताया कि एशियन यूनिवर्सिटी ने SIT के पास मौजूद रोल नंबर का मिलान किया तो गजट में उनका कोई जिक्र नहीं मिला। इससे उनके फर्जी होने की पुष्टि हो गई। इससे पहले कई यूनिवर्सिटी की जांच में भी वहां की डिग्री फर्जी पाई गई थी। यह था पूरा मामला 18 फरवरी को किदवई नगर पुलिस ने जूही गौशाला चौराहे के पास स्थित शैल ग्रुप ऑफ एजुकेशन के कार्यालय में छापा मारा था। वहां से पुलिस ने 9 राज्यों के 14 विश्वविद्यालयों और यूपी बोर्ड की 900 से अधिक मार्कशीट और डिग्री बरामद की थी। इनमें बीटेक, एमटेक, बीफार्मा, डीफार्मा, एलएलबी समेत कई पाठ्यक्रमों की डिग्रियां शामिल थी। मौके से पुलिस ने चार आरोपियों को भी गिरफ्तार किया था। जांच में सामने आया था कि यह गिरोह वर्ष 2012 से फर्जी डिग्री, माइग्रेशन और अंकपत्र तैयार करने का धंधा चला रहा था। पुलिस जांच में गिरोह का मास्टर माइंड शैलेंद्र कुमार ओझा निकला। उसके साथ नागेश मणि त्रिपाठी, जोगेंद्र और अश्वनी कुमार सिंह को भी गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका है। जांच के दौरान पुलिस को शैलेंद्र के बैंक खातों में पिछले चार वर्षों में करीब 5 करोड़ रुपए के लेनदेन के साक्ष्य भी मिले थे।

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