आज छठ का दूसरा दिन है। घर-मोहल्ले में गीत गूंज रहे हैं। पूजा की तैयारियां चल रही। मां आंगन में बैठी हैं। चेहरा कुछ उदास है। फोन पर बहन फिर से कह रही थी- तुम इस बार भी नहीं आए। मन भारी है। ये नौकरी और रोजी-रोटी के चक्कर में सबकुछ छूटता जा रहा। दैनिक भास्कर पलायन के इसी दर्द को बयां करता एक विशेष छठ गीत लाया है- ‘बिहारे में दे दीं रोजगार हे छठी मइया।’ गीत देखने-सुनने के लिए ऊपर दिए वीडियो पर क्लिक करें…
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