लखनऊ में भरत रंग नाट्य संस्था द्वारा आयोजित संस्कृत नाट्य कार्यशाला का समापन ‘अहम् कृष्ण: अस्मि!’ नाटक के मंचन के साथ हुआ। राय उमानाथ बली प्रेक्षागृह में प्रस्तुत इस नाटक ने दर्शकों को प्रभावित किया। कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन से हुआ। मुख्य अतिथि गिरीश चंद्र मिश्र, विभावरी सिंह और आनंद दीक्षित उपस्थित रहे। सभी अतिथियों ने कलाकारों के प्रयासों की सराहना करते हुए संस्कृत रंगमंच को बढ़ावा देने पर जोर दिया। नृत्य और अभिनय का उत्कृष्ट समन्वय दिखा नाटक का लेखन और निर्देशन चंद्रभाष सिंह ने किया, जबकि डॉ. उपासना दीक्षित ने नृत्य निर्देशन संभाला। इस प्रस्तुति की विशेषता यह रही कि 15 दिवसीय कार्यशाला के प्रतिभागियों ने ही मंच पर विभिन्न किरदार निभाए और अपने अभिनय से दर्शकों को प्रभावित किया।नाटक में नृत्य और अभिनय का उत्कृष्ट समन्वय देखने को मिला। भाव-भंगिमाओं और लयबद्ध नृत्य ने कहानी को और अधिक प्रभावी बनाया। श्रीकृष्ण को संघर्षशील पुरुष के तौर पर दिखाया गया ‘अहम् कृष्ण: अस्मि!’ नाटक में भगवान श्रीकृष्ण को एक नए दृष्टिकोण से प्रस्तुत किया गया। उन्हें केवल पूजनीय देव के रूप में नहीं, बल्कि एक संघर्षशील और नीति-पुरुष के तौर पर दर्शाया गया। नाटक में कृष्ण स्वयं सूत्रधार बनकर अपने जीवन के संघर्षों को उजागर करते हैं।इस प्रस्तुति का मुख्य संदेश था कि कृष्ण को केवल पूजना ही नहीं, बल्कि उनके आदर्शों को जीवन में अपनाना भी आवश्यक है। यह संदेश दर्शकों के बीच प्रभावी रहा। कलाकारों ने अभिनय से दर्शकों को प्रभावित किया मंच पर मुकुल कुमार, उज्ज्वल सिंह, लावण्या बाजपेई, अनूप जायसवाल सहित अन्य कलाकारों ने अभिनय किया। प्रस्तुति के समापन पर दर्शकों ने तालियों से कलाकारों और आयोजकों का उत्साहवर्धन किया। इस आयोजन को संस्कृत भाषा के प्रचार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

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