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सिद्धार्थनगर में संगीतमय श्रीराम कथा शुरू:कलश यात्रा में उमड़ी भीड़, ‘जय श्रीराम’ के जयघोष से गूंजा इलाका
सिद्धार्थनग के शोहरतगढ़ विधानसभा क्षेत्र के चिल्हिया बाजार में सोमवार से संगीतमय श्रीराम कथा का शुभारंभ हुआ। चिल्हिया पल्टा देवी मार्ग स्थित कथा स्थल पर सुप्रसिद्ध कथावाचक डॉ. संत इन्द्रदेव जी महाराज के श्रीमुख से सात दिवसीय कथा शुरू हुई। पहले ही दिन बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी, जिससे पूरा क्षेत्र भक्तिमय माहौल में डूब गया। कार्यक्रम की शुरुआत सोमवार सुबह भव्य कलश यात्रा के साथ हुई। सैकड़ों महिलाओं और युवतियों ने पारंपरिक वेशभूषा में सिर पर कलश धारण कर चिल्हिया बाजार के प्रमुख मार्गों से शोभायात्रा निकाली। इस दौरान श्रद्धालु भजन-कीर्तन करते हुए आगे बढ़े और जगह-जगह पुष्पवर्षा कर उनका स्वागत किया गया। कलशों में विभिन्न पवित्र नदियों और तीर्थ स्थलों का जल स्थापित किया गया था। यात्रा के दौरान “जय श्रीराम” के जयघोष से पूरा इलाका गूंज उठा। शाम को कथा शुरू होते ही पंडाल भर गया शाम 5 बजे कथा का विधिवत शुभारंभ हुआ। कथा शुरू होते ही विशाल पंडाल श्रद्धालुओं से खचाखच भर गया। डॉ. संत इन्द्रदेव जी महाराज ने अपनी ओजस्वी वाणी में भगवान श्रीराम के अवतार का महत्व समझाया। उन्होंने कहा कि जब-जब धरती पर अधर्म बढ़ता है, तब-तब भगवान धर्म की स्थापना के लिए अवतार लेते हैं। श्रीराम का अवतार भी मानवता को सत्य, मर्यादा और धर्म के मार्ग पर चलाने के लिए हुआ था। ‘राम केवल नाम नहीं, जीवन की ऊर्जा हैं’ कथा के दौरान महाराज जी ने कहा कि “राम” केवल एक नाम नहीं, बल्कि एक भावना और ऊर्जा है, जो हर प्राणी के भीतर वास करती है। उन्होंने कहा कि आज का मनुष्य बाहरी सुखों की तलाश में भटक रहा है, जबकि वास्तविक शांति और संतोष केवल प्रभु के नाम में ही निहित है। उन्होंने राम कथा को आत्मा की शुद्धि और जीवन को सही दिशा देने का माध्यम बताया। श्रीराम के जन्म और संस्कारों का किया मार्मिक वर्णन प्रवचन के दौरान कथावाचक ने भगवान श्रीराम के जन्म, बाल्यकाल और उनके संस्कारों का अत्यंत मार्मिक वर्णन किया। उन्होंने बताया कि किस तरह श्रीराम ने अपने जीवन में माता-पिता की आज्ञा का पालन करते हुए हर परिस्थिति में मर्यादा और धर्म को सर्वोपरि रखा। उन्होंने कहा कि यदि आज के परिवारों में राम जैसे संस्कार विकसित हो जाएं, तो समाज की अधिकांश समस्याएं स्वतः समाप्त हो सकती हैं। युवाओं को दिए अनुशासन और संस्कार के संदेश महाराज जी ने युवाओं को संबोधित करते हुए कहा कि वर्तमान पीढ़ी को अपने जीवन में अनुशासन, संयम और संस्कारों को अपनाना चाहिए। उन्होंने कहा कि आधुनिकता के साथ-साथ अपनी संस्कृति और परंपराओं को भी सहेजकर रखना जरूरी है। उन्होंने यह भी कहा कि जो व्यक्ति माता-पिता और गुरु का सम्मान करता है, वह जीवन में कभी असफल नहीं होता। भजन-कीर्तन में झूमे श्रद्धालु कथा के बीच-बीच में संगीतमय भजन-कीर्तन का ऐसा समावेश हुआ कि श्रद्धालु पूरी तरह भक्ति में डूब गए। जैसे ही भजन की धुन गूंजी, पूरा पंडाल झूम उठा। कई श्रद्धालु भक्ति भाव में उठकर नाचने लगे। महिलाएं, बुजुर्ग और युवा सभी प्रभु श्रीराम के नाम में लीन होकर भक्ति रस का आनंद लेते नजर आए। पूरा वातावरण आध्यात्मिक ऊर्जा से सराबोर दिखाई दिया। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए किए गए व्यापक इंतजाम आयोजन स्थल पर श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए व्यापक व्यवस्था की गई थी। विशाल पंडाल में बैठने की पर्याप्त व्यवस्था, शुद्ध पेयजल, प्रसाद वितरण और स्वच्छता का विशेष ध्यान रखा गया। साथ ही सुरक्षा व्यवस्था भी चाक-चौबंद रही, जिससे कार्यक्रम शांतिपूर्ण और सुव्यवस्थित ढंग से संपन्न हुआ। स्थानीय स्वयंसेवकों ने व्यवस्था बनाए रखने में अहम भूमिका निभाई। बड़ी संख्या में लोग रहे मौजूद इस भव्य आयोजन में यजमान के रूप में डॉ. राम प्रसाद गुप्ता, शैलेंद्र सिंह उर्फ शैलू सिंह, अंकित त्रिपाठी, सुरेंद्र नारायण विश्वकर्मा, घनश्याम गुप्ता, संजय कुमार, सुभाष, शनि, तौलेश्वर, राहुल वर्मा और संतोष चौधरी सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे। सभी ने श्रद्धा और भक्ति भाव के साथ कथा का श्रवण कर पुण्य लाभ अर्जित किया। धार्मिक आयोजन से आगे, सामाजिक संदेश भी चिल्हिया बाजार में आयोजित यह श्रीराम कथा केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि समाज को जोड़ने, सांस्कृतिक मूल्यों को मजबूत करने और नई पीढ़ी को सही दिशा देने का माध्यम भी बन रही है। यह आयोजन लोगों के भीतर भक्ति, श्रद्धा और नैतिक मूल्यों को जागृत करने का कार्य कर रहा है, जिसकी आज के समय में विशेष आवश्यकता है।
Source: Dainik Bhaskar via DNI News

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