फिरोजाबाद में छेड़छाड़ के दो दोषियों को सजा:एक को 7 साल, दूसरे को 3 साल की जेल, महिला का नहाते समय वीडियो बनाकर वायरल किया था


                 फिरोजाबाद में छेड़छाड़ के दो दोषियों को सजा:एक को 7 साल, दूसरे को 3 साल की जेल, महिला का नहाते समय वीडियो बनाकर वायरल किया था

फिरोजाबाद में छेड़छाड़ के दो दोषियों को सजा:एक को 7 साल, दूसरे को 3 साल की जेल, महिला का नहाते समय वीडियो बनाकर वायरल किया था

फिरोजाबाद के जसराना थाना क्षेत्र के एक गांव में महिला का नहाते समय आपत्तिजनक वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर वायरल करने के मामले में अदालत ने आठ साल बाद अहम फैसला सुनाया है। फास्ट ट्रैक कोर्ट ने सोमवार को दो आरोपियों को दोषी ठहराते हुए उन्हें कारावास और अर्थदंड की सजा सुनाई। मामला वर्ष 2018 का है। पीड़िता के पति ने जसराना थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। आरोप था कि पड़ोसी छटकी लाल उर्फ अमित कुमार ने चोरी-छिपे उसकी पत्नी का नहाते समय आपत्तिजनक वीडियो और फोटो बना लिया था। बाद में वह इन्हीं तस्वीरों और वीडियो के जरिए महिला को ब्लैकमेल करने लगा। 16 जून 2018 को सोशल मीडिया पर वायरल की थी सामग्री शिकायत के मुताबिक, आरोपी ने 16 जून 2018 को महिला की आपत्तिजनक सामग्री इंटरनेट मीडिया पर प्रसारित कर दी। घटना की जानकारी होने पर पीड़ित परिवार ने जब विरोध किया, तो आरोपियों ने उनके साथ गाली-गलौज और मारपीट भी की। मामले में गांव के ही जितेंद्र और अनिल कुमार पर मुख्य आरोपी का सहयोग करने का आरोप था। पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू की थी। मुख्य आरोपी ने विवेचना के दौरान कर ली थी आत्महत्या मुकदमे की विवेचना के दौरान मुख्य आरोपी छटकी लाल उर्फ अमित कुमार ने आत्महत्या कर ली थी। इसके बाद पुलिस ने मामले की जांच बाकी आरोपियों के खिलाफ जारी रखी। जांच के दौरान पुलिस ने साक्ष्य जुटाए और दोनों आरोपियों के खिलाफ आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल किया। फास्ट ट्रैक कोर्ट ने दोनों को ठहराया दोषी एडीजीसी मनोज कुमार शर्मा के अनुसार, एडीजे फास्ट ट्रैक कोर्ट प्रथम श्याम बाबू की अदालत ने सुनवाई पूरी होने के बाद अनिल कुमार और जितेंद्र को दोषी करार दिया। अदालत ने अनिल कुमार को 3 वर्ष की कारावास और 1 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई। वहीं जितेंद्र को 7 वर्ष की कारावास और 6 हजार रुपये अर्थदंड से दंडित किया गया। 8 साल बाद मिला इंसाफ यह मामला उस दौर का है, जब सोशल मीडिया का दुरुपयोग कर महिलाओं को ब्लैकमेल करने की घटनाएं तेजी से सामने आ रही थीं। अदालत के इस फैसले को पीड़िता के परिवार के लिए आठ साल बाद मिला न्याय माना जा रहा है।


Source: Dainik Bhaskar via DNI News

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