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झांसी में कॉमर्शियल LPG की किल्लत से महंगी हुई सेवईं:दुकानदार बोले-20 से 25 रुपए तक बढ़ गए दूध फैनी और सेवईं के दाम


                 झांसी में कॉमर्शियल LPG की किल्लत से महंगी हुई सेवईं:दुकानदार बोले-20 से 25 रुपए तक बढ़ गए दूध फैनी और सेवईं के दाम

झांसी में कॉमर्शियल LPG की किल्लत से महंगी हुई सेवईं:दुकानदार बोले-20 से 25 रुपए तक बढ़ गए दूध फैनी और सेवईं के दाम

झांसी में इस बार ईद की तैयारियों के बीच बाजार की रौनक पर महंगाई और गैस संकट का असर साफ नजर आ रहा है। खासतौर पर कॉमर्शियल गैस सिलेंडर की किल्लत ने सेवईं कारोबार को सीधे तौर पर प्रभावित किया है। जहां हर साल ईद से पहले दुकानों पर चहल-पहल और मीठी खुशबू का माहौल रहता था, वहीं इस बार उत्पादन से लेकर बिक्री तक हर स्तर पर मुश्किलें सामने आ रही हैं। सेवईं विक्रेता मोहम्मद आरिफ बताते हैं कि पिछले कई दिनों से कॉमर्शियल सिलेंडर की सप्लाई बाधित है। मजबूरी में कुछ लोग एलपीजी सिलेंडर ब्लैक में खरीद रहे हैं, जिसमें 500 से 1000 रुपए तक अतिरिक्त कीमत वसूली जा रही है। छोटे दुकानदारों के लिए यह खर्च उठाना आसान नहीं है, इसलिए उन्होंने लकड़ी की भट्टी का सहारा लेना शुरू कर दिया है। लेकिन यहां भी लागत कम नहीं हो रही, लकड़ी के दाम भी करीब 200 रुपए प्रति क्विंटल तक बढ़ चुके हैं। इससे उत्पादन की लागत लगातार बढ़ रही है और उसका सीधा असर सेवईं की कीमतों पर पड़ रहा है।
दामों में बढ़ोतरी ने बाजार की चाल धीमी कर दी है। पहले जहां दूध फैनी 120 रुपए किलो बिकती थी, अब वही 140 से 150 रुपए तक पहुंच गई है। बेहतर क्वालिटी की सेवईं, जो पहले 160-170 रुपए किलो थीं, अब 200 रुपए तक बिक रही हैं। बिसाती बाजार के दुकानदार मोहम्मद शाहिद बताते हैं कि ग्राहक अब जरूरत के हिसाब से ही खरीदारी कर रहे हैं। पहले जहां परिवार के लिए पांच किलो सेवईं खरीदी जाती थी, अब लोग दो या तीन किलो पर ही सिमट रहे हैं। इसका असर दुकानों की बिक्री पर साफ दिख रहा है और बाजार की रफ्तार भी सुस्त पड़ी है।
दुकानदारों का कहना है कि गैस की किल्लत के चलते उत्पादन भी समय पर नहीं हो पा रहा। पहले एक दिन में जितनी मात्रा में सेवईं तैयार हो जाती थी, अब उतनी बनाने में ज्यादा समय और मेहनत लग रही है। इससे सप्लाई भी प्रभावित हो रही है और कई दुकानों पर स्टॉक सीमित हो गया है। कुछ दुकानदारों ने तो एडवांस ऑर्डर लेना भी कम कर दिया है, ताकि उपलब्ध स्टॉक से ही काम चलाया जा सके।
हालांकि उम्मीदें अभी भी कायम हैं। दुकानदारों का मानना है कि जैसे-जैसे ईद करीब आएगी, खासकर शाम के वक्त बाजार में भीड़ बढ़ेगी और बिक्री में तेजी आ सकती है। कई लोग आखिरी समय पर खरीदारी करना पसंद करते हैं, जिससे कारोबार को कुछ राहत मिल सकती है।
इस बीच, देसी सेवईं की मांग सबसे ज्यादा बनी हुई है। आटे से तैयार होने वाली इन सेवईं को स्वाद और परंपरा के चलते लोग ज्यादा पसंद कर रहे हैं। ग्राहकों का कहना है कि ईद का असली स्वाद देसी सेवईं में ही आता है, इसलिए भले ही दाम बढ़ गए हों, वे कम मात्रा में सही लेकिन अच्छी क्वालिटी की सेवईं ही खरीदना चाहते हैं।
कुल मिलाकर, इस बार झांसी में ईद का बाजार महंगाई और गैस संकट की दोहरी मार झेल रहा है। उत्पादन की बढ़ी लागत और घटती खरीदारी ने दुकानदारों की चिंता बढ़ा दी है, जबकि ग्राहक भी बजट के हिसाब से ही त्योहार की तैयारियां करने को मजबूर हैं। फिर भी, उम्मीद यही है कि ईद की रौनक आखिरी दिनों में बाजार को कुछ राहत जरूर देगी।


Sourse: Dainik Bhaskar via DNI News

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