मुजफ्फरनगर में वकील के 3 हत्यारों को फांसी की सजा:जज ने फैसले में कविता लिखी; साढ़े 6 साल पहले मारकर मिट्टी में दबा दिया था
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मुजफ्फरनगर में वकील के 3 हत्यारों को फांसी की सजा:जज ने फैसले में कविता लिखी; साढ़े 6 साल पहले मारकर मिट्टी में दबा दिया था
मुजफ्फरनगर में चर्चित वकील समीर सैफी हत्याकांड में कोर्ट ने सोमवार को 3 दोषियों को फांसी की सजा सुनाई। एक हत्यारे को 7 साल की सजा हुई। सभी पर 10-10 लाख रुपए का जुर्माना भी लगाया। जज ने अपने फैसले में कविता भी लिखी- कचहरी की सीढ़ियों पर, आज सन्नाटा कुछ बोल रहा है, जहां दलीलों की गूंज थी कल, वहां खामोशी डोल रही है।
काला कोट जो ढाल बना था, सच की हर एक लड़ाई में, वो गिर पड़ा आज जमीन पर, झूठ की गहरी साजिश में।
कल तक जो कानून था जिंदा, हर जुर्म को आईना दिखाता था, आज उसी के रखवाले को, किसी ने बेरहमी से सुला डाला। पर ये खून बेकार नहीं जाएगा। वकील समीर की हत्या 6 साल पहले हुई थी। हत्या के दिन ही उसने अपने चैंबर का उद्घाटन किया था। हत्या 40 लाख रुपए को लेकर की गई थी। मृतक और दोषी पार्टनशिप में पोल्ट्री फॉर्म का काम करते थे। यह फैसला अपर जिला एवं सत्र न्यायालय/फास्ट ट्रैक कोर्ट-3 के जज रवि कुमार दिवाकर ने सुनाया। अब पढ़िए पूरा मामला… शहर कोतवाली क्षेत्र के लद्दावाला से 15 अक्टूबर, 2019 की शाम संदिग्ध हालात में वकील समीर सैफी गायब हो गए थे। 19 अक्टूबर को भोपा क्षेत्र के सीकरी में उनकी लाश मिली थी। समीर सैफी के पिता अजहर ने मुकदमा दर्ज कराया था। पुलिस जांच में खुलासा हुआ था कि 40 लाख के लेन-देन के विवाद में समीर का अपहरण कर हत्या की गई थी। पुलिस ने कहा कि समीर हत्यारों से अपने 40 लाख रुपए मांग रहा था। लेकिन, उन लोगों ने देने से मना कर दिया। साथ ही हत्या की साजिश रची। वो लोग समीर को शहर से कार में ले गए। फिर सीकरी फार्म पर रस्सी से गला घोंटकर उसकी हत्या कर दी और लाश को मिट्टी में दबा दिया था। पुलिस ने बकरा मार्केट में रहने वाले सोनू उर्फ रिजवान, सिंगोल अल्वी, शालू उर्फ अरबाज एवं भोपा के सीकरी निवासी दिनेश को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। चारों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी। सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से 6 गवाह कोर्ट में पेश किए थे। समीर हत्याकांड में कब क्या हुआ वारदात के दिन हुआ था चैंबर का उद्घाटन
कोर्ट में सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष के अधिवक्ता अनिल जिंदल ने कहा कि समीर एडवोकेट नहीं था, क्योंकि वह व्यापार भी करता था। इस पर समीर के वकील ने तर्क दिया कि यह बात सही है कि समीर पहले व्यापार भी करता था। हत्या से पहले काउंसिल ऑफ उत्तर प्रदेश में रजिस्ट्रेशन कराकर अधिवक्ता बना था। वहीं, समीर सैफी के पिता अजहर ने कोर्ट में अपने बयान में कहा था कि घटना के दिन ही समीर ने कचहरी में अपने चैंबर का उद्घाटन किया था। सिंगोल अल्वी के साथ सुबह झगड़ा, शाम को हत्या
पुलिस की जांच में सामने आया कि वकील बनने से पहले समीर सैफी और सिंगोल अल्वी पार्टनशिप में काम करते थे। रॉयल पोल्ट्री फीड के नाम से समीर का रजिस्ट्रेशन था। इसी नाम से उसके बैंक खाते थे। फर्म को चलाने के लिए उन्होंने करीब 25 लाख रुपए का लोन भी लिया था। बाद में 40 लाख रुपए को लेकर समीर सैफी और सिंगोल अल्वी के बीच झगड़ा शुरू हो गया था। वारदात (15 अक्टूबर, 2019) की सुबह करीब 8 बजे लेन-देने को लेकर समीर सैफी के भाई का सिंगोल अल्वी के साथ झगड़ा भी हुआ था। किसको क्या सजा हुई
सिंगोल अल्वी, सोनू उर्फ रिजवान और शालू उर्फ अरबाज को अपहरण, हत्या, साजिश और साक्ष्य मिटाने में दोषी पाया गया। तीनों को फांसी की सजा सुनाई गई। दिनेश पर साक्ष्य मिटाने का आरोप साबित हुआ। उसे 7 साल की सजा सुनाई गई। अपहरण में सिंगोल अल्वी की कार इस्तेमाल हुई थी। सोनू उर्फ रिजवान कार का ड्राइवर था, जबकि शालू उर्फ अरबाज और दिनेश उसके नौकर थे। अब भास्कर के सबसे बड़े सर्वे में हिस्सा लीजिए… यूपी में विधायकों के 4 साल पूरे हो चुके हैं। क्या आपके मौजूदा विधायक को 2027 के विधानसभा चुनाव में टिकट मिलना चाहिए? भास्कर सर्वे में हिस्सा लेकर बताइए… ————————- ये खबरें भी पढ़ें किस हॉस्पिटल में किसका ट्रांसप्लांट, सब सीक्रेट, ढाई करोड़ में अफ्रीकी महिला का ऑपरेशन कानपुर किडनी ट्रांसप्लांट रैकेट का कनेक्शन सिर्फ यूपी ही नहीं, विदेश से भी जुड़ रहा है। विदेशों के मरीज भी यहां चोरी-छिपे किडनी ट्रांसप्लांट कराने आते थे। तस्करों ने दिल्ली, मुंबई, पश्चिम बंगाल समेत कई राज्यों में किडनी ट्रांसप्लांट का खेल करने के लिए हॉस्पिटल और डॉक्टरों का पैनल बना रखा है। डोनर और रिसीवर दोनों से डील फाइनल होने के बाद यह लोग देश के अलग-अलग ठिकानों पर अवैध रूप से किडनी ट्रांसप्लांट करते थे। पढ़ें पूरी खबर OT टेक्नीशियन ने निकाली थी MBA स्टूडेंट की किडनी, कानपुर में ट्रांसप्लांट किया; मेरठ के 3 डॉक्टरों के भी नाम सामने आए कानपुर में MBA स्टूडेंट आयुष की किडनी किसी डॉक्टर ने नहीं, बल्कि एक ओटी टेक्नीशियन ने निकाली थी। उसी ने पारुल तोमर को किडनी ट्रांसप्लांट भी किया था। डीसीपी एसएम कासिम आबिदी ने यह जानकारी दैनिक भास्कर को दी। उन्होंने बताया- आरोपी ओटी टेक्नीशियन मुदस्सर अली सिद्दीकी दिल्ली के उत्तम नगर का रहने वाला है। पढ़ें पूरी खबर
Source: Dainik Bhaskar via DNI News
