महोबा में ग्रामीणों का प्रदर्शन:मुआवजे और पुनर्वास की मांग को लेकर कलेक्ट्रेट में जुटे, कहा- रहने का ठिकाना नहीं है
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महोबा में ग्रामीणों का प्रदर्शन:मुआवजे और पुनर्वास की मांग को लेकर कलेक्ट्रेट में जुटे, कहा- रहने का ठिकाना नहीं है
महोबा के अलीपुरा गांव के दर्जनों परिवारों ने मुआवजे और पुनर्वास के वादे पूरे न होने के विरोध में जिलाधिकारी कार्यालय पर प्रदर्शन किया। ग्रामीणों का आरोप है कि नेशनल हाईवे और सिंचाई विभाग की परियोजनाओं के कारण उनके पुश्तैनी मकानों का अधिग्रहण किया जा रहा है, जिससे उनके सामने बेघर होने का संकट खड़ा हो गया है। अलीपुरा गांव के ये परिवार सिंचाई विभाग के मौदहा बांध और नेशनल हाईवे के चौड़ीकरण की दोहरी मार झेल रहे हैं। इन विकास परियोजनाओं के कारण उनके मकानों का अधिग्रहण किया जा रहा है, लेकिन उन्हें उचित मुआवजा और पुनर्वास नहीं मिल पा रहा है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि सिंचाई विभाग द्वारा विस्थापन के लिए तैयार की जा रही सूची में कई पात्र परिवारों के नाम शामिल नहीं किए गए हैं। पीड़ित बुधिया ने बताया कि नेशनल हाईवे के लिए केवल दीवारों का मुआवजा दिया जा रहा है, जो नया घर बनाने के लिए अपर्याप्त है। दशरथ और अन्य ग्रामीणों के अनुसार, प्रशासन ने पहले मकान का मुआवजा और जमीन का पट्टा दोनों देने का वादा किया था, लेकिन अब अधिकारी अपने वादे से मुकर रहे हैं। अलीपुरा के इन परिवारों की मांग है कि उन्हें दोहरे अधिग्रहण की समस्या से बचाया जाए। उनका कहना है कि यदि जमीन बांध के डूब क्षेत्र में आती है तो उसका मुआवजा अलग से मिले, और यदि मकान नेशनल हाईवे में टूटता है तो उसकी भरपाई अलग से की जाए। दशरथ, अर्जुन, महेश और देवीदीन जैसे कई मजदूर परिवारों के पास रहने के लिए कोई अन्य ठिकाना नहीं है। ग्रामीणों ने जिलाधिकारी को एक ज्ञापन सौंपकर गुहार लगाई है कि उन्हें सरकार की पुनर्वास योजना में शामिल किया जाए और नियमानुसार पूरा मुआवजा दिया जाए। ताकि सिर छुपाने के लिए उन्हें दोबारा छत मिल सके।
Source: Dainik Bhaskar via DNI News
